3 सितंबर 2001 के बाद नियुक्त शिक्षकों की पदोन्नति में TET अनिवार्य, सुप्रीम कोर्ट में NCTE का बड़ा हलफनामा, और भी बहुत कुछ.. जानिए पूरा मामला और क्या कहा परिषद ने। – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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NCTE ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- भर्ती और पदोन्नति दोनों में TET न्यूनतम योग्यता, नियमों में किसी प्रकार की छूट संभव नहीं

शिक्षक भर्ती और पदोन्नति में Teacher Eligibility Test (TET) की अनिवार्यता को लेकर चल रही कानूनी बहस के बीच राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने सुप्रीम कोर्ट में अपना स्पष्ट पक्ष रखा है। परिषद ने न्यायालय में दायर हलफनामे में कहा है कि 3 सितंबर 2001 के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए पदोन्नति में TET अनिवार्य रहेगा और इस संबंध में जारी नियमों में किसी प्रकार की छूट का प्रावधान नहीं है।

यह हलफनामा दीवानी अपील संख्या 1385/2025 (Anjuman Ishat-e-Taleem Trust बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य) में दायर किया गया है, जिसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है।


क्या कहा NCTE ने अपने हलफनामे में?

NCTE ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि शिक्षक भर्ती और पदोन्नति से जुड़े मामलों में परिषद द्वारा जारी अधिसूचनाओं और विनियमों का पालन किया जाना आवश्यक है। परिषद के अनुसार TET केवल नियुक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि पदोन्नति के लिए भी न्यूनतम एवं अनिवार्य योग्यता है।

परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अनिवार्यता में किसी भी प्रकार की छूट देने का प्रावधान नहीं है।


किन शिक्षकों पर लागू होगी TET की अनिवार्यता?

हलफनामे में स्पष्ट किया गया है कि:

  • 3 सितंबर 2001 के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य होगी।
  • विशेष रूप से 23 अगस्त 2010 और 29 जुलाई 2011 के बाद लागू नियमों के अनुसार नियुक्त शिक्षकों की पदोन्नति में भी TET आवश्यक होगी।
  • पुराने शिक्षकों की स्थिति पहले से जारी प्रावधानों के अनुसार अलग मानी गई है।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए जरूरी है TET

NCTE ने अपने हलफनामे में कहा कि TET लागू करने का मुख्य उद्देश्य—

  • शिक्षक गुणवत्ता सुनिश्चित करना,
  • शिक्षक शिक्षा संस्थानों में सुधार लाना,
  • योग्य शिक्षकों का चयन करना,
  • और विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना है।

इसी उद्देश्य से शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में TET को अनिवार्य बनाया गया था।


NCTE को कानून से मिला है योग्यता तय करने का अधिकार

हलफनामे में कहा गया है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद अधिनियम, 1993 तथा शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के तहत शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने का अधिकार NCTE को प्राप्त है।

इसी अधिकार के आधार पर वर्ष 2010 और 2014 की अधिसूचनाओं में कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों की नियुक्ति के लिए TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया था।


भर्ती और पदोन्नति दोनों में लागू होंगे नियम

NCTE ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वर्ष 2014 के विनियमों में केवल नियुक्ति ही नहीं, बल्कि शिक्षकों की पदोन्नति के लिए भी TET को न्यूनतम योग्यता के रूप में शामिल किया गया है। परिषद ने कहा कि वर्तमान विनियमों में TET की अनिवार्यता से किसी प्रकार की छूट नहीं दी जा सकती।


सुप्रीम कोर्ट में चल रही है सुनवाई

यह मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। NCTE ने अपना आधिकारिक पक्ष हलफनामे के माध्यम से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है। अब इस विषय पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।


महत्वपूर्ण बिंदु (Highlights)

  • ✅ NCTE ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया।
  • ✅ 3 सितंबर 2001 के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए पदोन्नति में TET अनिवार्य बताया।
  • ✅ भर्ती और पदोन्नति दोनों में TET को न्यूनतम योग्यता माना गया।
  • ✅ नियमों में किसी प्रकार की छूट का प्रावधान नहीं बताया गया।
  • ✅ मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन, अंतिम फैसला न्यायालय करेगा।

Disclaimer

यह समाचार उपलब्ध दस्तावेज़/समाचार पत्र में प्रकाशित जानकारी और NCTE द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे पर आधारित है। यह विषय वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। अंतिम कानूनी स्थिति सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।


NCTE ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि 3 सितंबर 2001 के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए भर्ती और पदोन्नति दोनों में TET अनिवार्य है। जानिए पूरा मामला और क्या कहा परिषद ने।

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