नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने श्रम और रोजगार मंत्रालय के माध्यम से कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलावों को मंजूरी दे दी है। नई व्यवस्था 1 अगस्त 2026 से लागू होगी। इसका उद्देश्य EPF सेवाओं को अधिक डिजिटल, पारदर्शी और कर्मचारी हितैषी बनाना है। साथ ही सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत कई प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है।
₹15,000 तक वेतन वालों के लिए 12% EPF योगदान अनिवार्य
नई व्यवस्था के अनुसार ₹15,000 तक मासिक मूल वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए 12 प्रतिशत EPF योगदान अनिवार्य रहेगा। हालांकि, कर्मचारियों का अनिवार्य योगदान अधिकतम ₹1,800 प्रति माह तक सीमित होगा।
वहीं जिन कर्मचारियों का मूल वेतन ₹15,000 से अधिक है, वे अपनी इच्छा के अनुसार स्वैच्छिक (Voluntary) EPF योगदान कर सकेंगे। ऐसे कर्मचारी आवश्यकता के अनुसार योगदान बढ़ा या घटा भी सकेंगे।
निकासी और दावों का होगा तय समय में निपटारा
नई व्यवस्था में EPFO को निकासी, पेंशन और बीमा संबंधी दावों का 20 दिनों के भीतर निस्तारण करना होगा। यदि निर्धारित समय सीमा में दावा नहीं निपटाया जाता है, तो संबंधित मामलों में 12 प्रतिशत वार्षिक दर से देय ब्याज का प्रावधान किया गया है।
EPFO की वेबसाइट पर नई सुविधा
EPFO की नई डिजिटल सेवाओं को शुरू करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार EPFO की वेबसाइट का अपडेट कार्य पूरा होने के बाद ऑनलाइन निकासी (Withdrawal) की नई सुविधा शुरू की जाएगी। शुरुआत में कुछ समय तक इसका ट्रायल चलेगा, इसके बाद सभी पात्र सदस्यों के लिए यह सेवा उपलब्ध कराई जाएगी।
डिजिटल प्रक्रिया को मिलेगा बढ़ावा
नई सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के तहत अधिकतर प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से पूरा किया जाएगा। इससे कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन और अन्य सेवाओं का लाभ पहले की तुलना में अधिक तेज और पारदर्शी तरीके से मिल सकेगा।
अधिकारियों ने क्या कहा?
EPFO के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इन बदलावों का उद्देश्य कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। हालांकि, नियोक्ताओं और कर्मचारियों के मौजूदा योगदान के मूल नियमों में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं किया गया है। नई व्यवस्था मुख्य रूप से प्रक्रियाओं को सरल, डिजिटल और समयबद्ध बनाने पर केंद्रित है।
इन बदलावों के लागू होने के बाद देशभर के करोड़ों EPF खाताधारकों को ऑनलाइन सेवाओं, दावों के तेज निस्तारण और अधिक पारदर्शी व्यवस्था का लाभ मिलने की उम्मीद है।
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