प्राइमरी टीचर्स की कब आएगी ट्रांसफर लिस्ट ? दंपती शिक्षकों को 11 साल बाद मौका; बेसब्री से इंतजार
उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के छह हजार शिक्षकों को तबादले का इंतजार है। दिव्यांग, गंभीर रोगी और दंपत्ति शिक्षकों ने अंतर्जनपदीय स्थानांतरण के लिए आवेदन किया था। दंपत्ति शिक्षकों के तो 11 साल बाद एक जिले से दूसरे जिले में ट्रांसफर किए जाने हैं। तबादला लिस्ट जारी न होने से शिक्षक मायूस हैं।
परिषदीय स्कूलों के जिन शिक्षकों ने स्थानांतरण के लिए आवेदन किया है, अब वह तबादला सूची जारी न होने से परेशान हैं। स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियों के बाद फिर से पढ़ाई शुरू हो गई है और अब तक स्थानांतरण को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ। तबादला सूची तैयार रखी है लेकिन वह जारी नहीं हो पा रही। स्कूल चलो अभियान के साथ-साथ विद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए गतिविधियां भी शुरू होंगी। ऐसे में शिक्षकों को भय है कि कहीं उनका स्थानांतरण न फंस जाए। आवेदन के समय छात्र-शिक्षक अनुपात को लेकर दंपत्ति शिक्षकों के बीच असमंजस की स्थिति रही। कई पति-पत्नी शिक्षकों ने आवेदन फॉर्म भी वापस ले लिए। वह भी दोबारा आवेदन फॉर्म जमा करने की मांग कर रहे थे लेकिन उनकी भी सुनवाई नहीं हो पाई।
उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव कहते हैं कि शिक्षकों के स्थानांतरण की सूची जल्द से जल्द जारी की जाए। दिव्यांग शिक्षक, कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित शिक्षक और दंपत्ति नीति के तहत आवेदन करने वाले शिक्षकों को राहत मिलनी चाहिए। दंपत्ति नीति के तहत वर्ष 2015 के अंत में परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों के स्थानांतरण हुए थे अब 11 साल बाद पति-पत्नी शिक्षकों को एक ही जिले में नौकरी करने का अवसर मिलना है लेकिन देरी से वह परेशान हैं।
शिक्षक समायोजन 30 सितंबर की छात्र संख्या के आधार पर हो
उधर, प्राइमरी स्कूलों में 30 अप्रैल की छात्र संख्या को आधार मानकर किए जा रहे शिक्षकों के समायोजन का विरोध शुरू हो गया है। इस प्रक्रिया से शिक्षकों में भारी आक्रोश है। शिक्षकों की मांग है कि शासन समायोजन सितम्बर में शिक्षक व छात्र संख्या के आधार पर करे।उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडे ने इस प्रक्रिया पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि ‘स्कूल चलो अभियान’ के तहत 15 जुलाई तक नामांकन प्रक्रिया चलती है। ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर दाखिले जुलाई में ही होते हैं। 31 मार्च को कक्षा पांच व आठ के बच्चे पास होकर दूसरे स्कूल चले जाते हैं।
इससे अप्रैल में छात्र संख्या अचानक कम हो जाती है। ऐसे में 30 अप्रैल को आधार मानने से हजारों शिक्षक प्रभावित होंगे। छात्र-शिक्षक अनुपात बिगड़ जाएगा। संघ ने शासन से मांग की है कि पूर्व की भांति 30 सितंबर की छात्र संख्या को ही आधार मानकर समायोजन प्रक्रिया को अपनाया जाए। संगठन की सरकार से मांग है कि हाईकोर्ट में बीते वर्ष 30 सितंबर की छात्र संख्या को आधार मानकर समायोजन प्रक्रिया पर पक्ष रखे।
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