इंटर कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत
लखनऊ, । हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्रदेश भर के इंटर कॉलेजों में वर्ष 2013 के विज्ञापन के क्रम में की गई प्रधानाचार्यों की नियुक्तियों को रद्द करने के एकल पीठ के फैसले को निरस्त कर दिया है।
यह निर्णय न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला खंडपीठ ने श्याम शंकर उपाध्याय व अन्य तथा यूपी सेकेंड्री एजुकेशन सर्विसेज, इलाहाबाद की ओर से दाखिल अलग-अलग अपीलों पर पारित किया है। वर्ष 2023 में ही न्यायालय ने पाया था कि बड़ी मात्रा में हो चुकी नियुक्तियां एकल पीठ के निर्णय से प्रभावित होंगी तथा अपीलार्थीगण प्रधानाचार्य के पद पर दिसम्बर 2022 से कार्य भी कर रहे हैं। ऐसे में न्यायालय ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश पारित किया था।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में प्रधानाचार्यों की नियुक्ति प्रकिया वर्ष 2013 में विज्ञापन संख्या 3 जारी करते हुए शुरू की गई थी। एकल पीठ के समक्ष कहा गया था कि यह प्रकिया नौ वर्षों तक ठप रही और अचानक वर्ष 2022 में एक माह के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा कर दिया गया, जिसमें अन्य नियमों का भी ख्याल नहीं रखा गया। एकल पीठ ने एक फरवरी 2023 के अपने फैसले में कहा था कि विज्ञापन जारी करने के नौ वर्ष बाद की गईं नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन हैं। एकल पीठ ने नियुक्तियों को रद् करने के साथ ही नए सिरे से नियुक्तियों की प्रकिया जल्द पूरी करने का आदेश दिया था। हालांकि इस फैसले के अंतिम तौर पर निरस्त हो जाने के बाद आयोग से चयनित प्रधानाचार्यो की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।
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