TGT: जब 25% प्रश्न ही गलत तो अंक पुनर्वितरण से न्याय असंभव
प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) भर्ती 2026 अंग्रेजी विषय की परीक्षा के प्रश्नपत्रों को तैयार किए जाने में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि जब 25 प्रतिशत प्रश्न ही गलत अथवा पाठ्यक्रम से बाहर के हों तो सिर्फ अंक पुनर्वितरण से न्याय नहीं हो सकता। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने बुधवार को आदित्य कुमार सिंह व 17 अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा है कि आयोग हलफनामे के साथ 17 अगस्त तक आठ विवादित प्रश्न याचीगण को दें ताकि वे यह देख सकें कि यह पाठ्यक्रम से बाहर के हैं अथवा नहीं।
चार अगस्त के आदेश के क्रम में आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक व्यक्तिगत हलफनामे के साथ कोर्ट में पेश हुए थे। हलफनामे में आयोग ने स्वीकार किया कि प्रश्नपत्र में 29 प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर और चार प्रश्न गलत थे। यानी कुल 33 प्रश्न, जो लगभग 25 प्रतिशत बनते हैं। कोर्ट ने एमओयू तथा एसओपी की जांच की। यह तथ्य सामने आया कि प्रश्नपत्र बनाने के लिए बाहरी एजेंसी से एमओयू किया जाता है। एजेंसी हर परीक्षा के लिए अलग प्रश्न बैंक और साफ्टवेयर बनाती है। इसके बाद ऑटोमेटेड रैंडमाइजेशन से प्रश्नपत्र के दो सेट तैयार होते हैं। चेयरमैन इनमें से किसी एक सेट की आईडी रैंडम चुन लेते हैं। कोर्ट ने कहा, इस पूरी प्रक्रिया में यह जांचने की कोई व्यवस्था ही नहीं है कि रैंडम चुने गए प्रश्न सही हैं या सिलेबस में हैं। एमओयू के क्लाज 21 में सिर्फ आर्थिक दंड का प्रावधान है। यदि एजेंसी गलत प्रश्न देती है तो उसे ब्लैकलिस्ट करने की बात नहीं है। इस पर आयोग के सचिव ने कहा कि एमओयू में ब्लैकलिस्ट का प्रावधान जोड़ने के लिए आयोग तैयार है। प्रश्नपत्र जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी की “दूसरी परत” बनाने पर भी विचार किया जा सकता है। याचीगण की ओर से कहा गया कि 29 प्रश्न ही गलत माने गए हैं, जबकि आपत्ति 37 प्रश्नों पर थी। शेष आठ प्रश्नों का ब्यौरा भी दिया जाए। सचिव ने कहा कि अंतिम उत्तरकुंजी के साथ ही ये प्रश्न सार्वजनिक होंगे। कोर्ट ने इसे नहीं माना और कहा कि यदि एक भी प्रश्न और पाठ्यक्रम से बाहर निकला तो परिणाम बदल सकता है। सचिव पहली सितंबर 2026 तक हलफनामा दाखिल कर बताएं कि एमओयू में सख्त प्रावधान और जांच की दूसरी परत कैसे जोड़ी जाएगी? कोर्ट ने कहा- गलत प्रश्न हल करने में अभ्यर्थी का अतिरिक्त समय लगता है, जिसकी भरपाई अंक बांटने से नहीं हो सकती। कई बार 0.5 प्रतिशत अंक से भी चयन सूची बदल जाती है। परिणाम घोषित होने से पहले इस मुद्दे का निस्तारण जरूरी है।
आठ प्रश्नों का ब्यौरा 17 अगस्त तक देने का आदेश
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