लोक सेवा आयोग की मूल्यांकन प्रक्रिया को चुनौती
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित संयुक्त राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा 2024 के अंतिम परिणाम एवं मूल्यांकन-मॉडरेशन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर लोक सेवा आयोग से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम ने राहुल कुमार सिंह एवं अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
याचिका की सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से जरूरी पत्रजात उपलब्ध कराए गए। आयोग को याचिका में जवाब दाखिल करने का समय देते हुए कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि याची द्वारा आरटीआई के माध्यम से अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका देखने के लिए आवेदन किया जाता है तो उन्हें उत्तर पुस्तिका देखने की अनुमति दी जाए।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि लिखित परीक्षा की कॉपियों के मूल्यांकन में परीक्षक वार भिन्नता को दूर करने के लिए अपनाई गई मॉडरेशन प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न उठते हैं। याचियों के अनुसार आयोग द्वारा उपलब्ध कराई गई (आरटीआई) सूचना से यह सामने आया है कि लगभग छह प्रतिशत मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं का मुख्य परीक्षक द्वारा मॉडरेशन किया गया जबकि लगभग 94 प्रतिशत उत्तर पुस्तिकाएं इस प्रक्रिया से बाहर रहीं। याचिका में यह भी कहा गया है कि पीसीएस मुख्य परीक्षा 2024 के परिणाम में विभिन्न रोल नंबर श्रृंखलाओं के बीच चयन दर में उल्लेखनीय अंतर दिखाई देता है। याचियों के अनुसार तुलनात्मक विश्लेषण के अनुसार 00 और 01 शृंखला के अभ्यर्थियों की चयन दर लगभग 8.9 प्रतिशत जबकि 02 से 05 श्रृंखला के अभ्यर्थियों की चयन दर लगभग 4.85 प्रतिशत रही।
याचिका में यह मुद्दा भी उठाया गया है कि आयोग ने मॉडरेशन की विस्तृत पद्धति, परीक्षक-वार मूल्यांकन, कच्चे अंक और मॉडरेशन के बाद प्राप्त अंकों से संबंधित पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। याचिका में व्यक्तिगत उत्तर पुस्तिका की मात्र पुनर्मूल्यांकन की बजाय पूरी मूल्यांकन और मॉडरेशन पद्धति की न्यायिक जांच की मांग की गई है।
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