तीन महीने में ही बंद हुई पिंक बस, शिक्षिकाओं व छात्राओं की बढ़ी परेशानी

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तीन महीने में ही बंद हुई पिंक बस, शिक्षिकाओं व छात्राओं की बढ़ी परेशानी

कैमूर जिले में महिलाओं और छात्राओं को सुरक्षित एवं सुगम सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करीब तीन महीने पहले शुरू की गयी पिंक बस सेवा अब बंद पड़ी है. भभुआ-मोहनिया के बीच संचालित इस विशेष बस के बंद रहने से इस मार्ग पर स्थित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षिकाओं, कॉलेज की छात्राओं और रोजाना सफर करने वाली महिला यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. बताया जा रहा है कि बस को सर्विसिंग के लिए आरा भेजा गया था, लेकिन 10 दिन से अधिक समय बीतने के बाद भी वह वापस नहीं लौटी है.

शुरुआत में कम यात्री, फिर बढ़ा महिलाओं का भरोसा

पिंक बस सेवा शुरू होने के शुरुआती दिनों में महिलाओं के बीच जागरूकता कम होने के कारण यात्रियों की संख्या कम थी. धीरे-धीरे शिक्षिकाओं, छात्राओं और अन्य महिला यात्रियों को इस सुविधा की जानकारी हुई और उन्होंने नियमित रूप से पिंक बस से सफर करना शुरू कर दिया. बस के बंद होने से अब महिला यात्रियों को फिर से निजी वाहनों और दूसरे साधनों पर निर्भर होना पड़ रहा है.

महिला सुरक्षा को ध्यान में रखकर शुरू हुई थी सेवा

पिंक बस को कैमूर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तौर पर शुरू किया गया था. जिला प्रशासन के प्रयास से बिहार राज्य सड़क परिवहन निगम की ओर से जिले में पहली बार सिटी बस सेवा शुरू की गयी थी. जिला पदाधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर दो बसों को रवाना किया था. इनमें एक सामान्य सिटी बस और दूसरी महिलाओं के लिए विशेष पिंक बस थी. पिंक बस में महिला संवाहक की भी तैनाती की गयी थी, ताकि महिला यात्रियों को सुरक्षित और सहज वातावरण मिल सके.

ऐसा था बस का समय, स्कूल-कॉलेज पहुंचने में मिलती थी सुविधा

भभुआ-मोहनिया मार्ग पर पिंक बस की समय-सारणी इस तरह निर्धारित की गयी थी कि कार्यालय, विद्यालय और कॉलेज जाने वाली महिलाओं एवं छात्राओं को सुविधा मिल सके. बस के समय से शिक्षिकाएं समय पर विद्यालय पहुंच जाती थीं. कॉलेज जाने वाली छात्राओं के लिए भी यह सुरक्षित और सुविधाजनक विकल्प बन गया था. भभुआ और मोहनिया के बीच रोजाना आने-जाने वाली अन्य महिलाओं ने भी इसका लाभ उठाना शुरू कर दिया था.

शिक्षिका अंजुम फिरदौस सहित कई शिक्षिकाओं ने बताया कि पिंक बस का समय काफी सुविधाजनक था. इससे विद्यालय पहुंचने में परेशानी नहीं होती थी. बस में महिला यात्रियों को सुरक्षित माहौल भी मिलता था. अब एक सप्ताह से अधिक समय से सेवा बंद होने के कारण आने-जाने की समस्या फिर बढ़ गयी है.

दिनभर पांच खेप चलाने के लिए निर्धारित थी बस

पिंक बस की शुरुआत केवल परिवहन सुविधा देने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक सार्वजनिक यात्रा का विकल्प उपलब्ध कराने के लिए की गयी थी. भभुआ-मोहनिया मार्ग पर इसे दिनभर पांच खेप चलाने के लिए निर्धारित किया गया था. सुबह से शाम तक चलने वाली इस बस का सबसे अधिक लाभ नौकरीपेशा महिलाओं, शिक्षिकाओं, छात्राओं और नियमित यात्रियों को मिल रहा था.

सर्विसिंग के लिए आरा भेजी गयी, अब तक नहीं लौटी

पिंक बस के चालक शमीम इदरसी ने बताया कि बस को सर्विसिंग के लिए आरा भेजने के लिए कहा गया था. बस आरा भेजे जाने के बाद 10 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन सर्विसिंग के बाद उसे अभी तक भभुआ-मोहनिया रूट पर वापस नहीं भेजा गया है. चालक के अनुसार, उनके स्तर से संबंधित लोगों से संपर्क कर बस के बारे में जानकारी ली जा रही है. वहां से उन्हें आरा आने के लिए कहा जा रहा है.

DTO बोले- बस बंद होने की जानकारी नहीं

पिंक बस के इतने दिनों से बंद रहने के संबंध में जिला परिवहन पदाधिकारी ललित राही से जानकारी ली गयी तो उन्होंने कहा कि उन्हें बस के बंद रहने की जानकारी नहीं है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि महिला यात्रियों की सुविधा के लिए शुरू की गयी विशेष बस सेवा इतने दिनों से बंद है, लेकिन इसकी जानकारी विभागीय स्तर तक क्यों नहीं पहुंची.

जल्द संचालन शुरू करने की मांग

पिंक बस सेवा को दोबारा शुरू कराने की मांग महिला यात्रियों ने की है. उनका कहना है कि सेवा शुरू होने के बाद शिक्षिकाओं और छात्राओं समेत कई महिलाओं ने इसे अपनी रोजमर्रा की यात्रा का हिस्सा बना लिया था. ऐसे में बस के लंबे समय तक बंद रहने से उनकी परेशानी बढ़ गयी है. महिला यात्रियों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से पिंक बस को जल्द से जल्द भभुआ-मोहनिया मार्ग पर वापस चलाने की मांग की है, ताकि उन्हें सुरक्षित और समयबद्ध यात्रा की सुविधा फिर से मिल सके.

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