तैयारी : दूसरे यूपीआई ऐप पर सिम की तरह पोर्ट कर सकेंगे भुगतान निर्देश
यूपीआई के जरिए होने वाले ऑटोमैटिक पेमेंट को लेकर भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। इसके तहत यूपीआई ऑटो पे को पोर्ट करने लायक बनाया जाएगा, यानी ग्राहक अपने मौजूदा ऑटो पे मैंडेट को एक यूपीआई ऐप से दूसरे ऐप में ट्रांसफर कर सकेंगे।
अभी ऐप बदलने पर कई बार पुराने भुगतान निर्देश को रद्द करके नए ऐप में दोबारा बनाना पड़ता है। इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उन ग्राहकों को मिलेगा, जो यूपीआई ऑटो पे के जरिए ओटीटी सब्सक्रिप्शन, बीमा प्रीमियम, एसआईपी, लोन की मासिक किस्त या दूसरे नियमित भुगतान करते हैं।
इससे भुगतान प्रणाली को बदलना आसान होगा और किसी जरूरी भुगतान के छूटने की आशंका भी कम हो सकती है। ग्राहकों को अलग ऐप में बने भुगतान निर्देशों को एक जगह देखने की सुविधा मिल सकती है।
कारोबारियों को फायदा
कंपनी अपना पेमेंट गेटवे बदलती है तो पुराने ऑटो पे मैंडेट भी नए
भुगतान प्रदाता के पास ले जा सकेगी।
अभी नए ग्राहक नए गेटवे पर जोड़े जाते हैं, लेकिन पुराने मैंडेट पुराने प्रदाता के साथ बने रहते हैं। कोई कंपनी दूसरे गेटवे पर जाना चाहती है तो उसके पुराने मैंडेट भी नए गेटवे से काम करेंगे।
1.8 अरब ई-मैंडेट लेनदेन जुलाई में प्रोसेस किए, जो जुलाई 25 के 58.5 करोड़ के मुकाबले तीन गुना से ज्यादा है
बढ़ रहा इस्तेमाल
यूपीआई ऑटो पे की शुरुआत 2020 में हुई थी। इसके जरिये विभिन्न ओटीटी सब्सक्रिप्शन, बीमा, लोन और म्यूचुअल फंड निवेश जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ा है। जुलाई में शीर्ष 10 बैंकों ने मिलकर करीब 1.8 अरब यूपीआई ई-मैंडेट लेनदेन प्रोसेस किए, जो जुलाई 2025 के करीब 58.5 करोड़ के मुकाबले तीन गुना से ज्यादा है। वहीं, इससे छोटे ऐप को भी फायदा मिल सकता है। नई व्यवस्था आने के बाद ग्राहक कैशबैक, बेहतर सेवा या दूसरे ऑफर के आधार पर यूपीआई ऐप बदल सकेगा।
बैंक खाता वही रहेगा
इंटरऑपरेबिलिटी का मतलब यह नहीं है कि ऑटो पे से पैसा किसी दूसरे बैंक खाते से कटने लगेगा। जिस बैंक खाते से ग्राहक ने मूल रूप से भुगतान निर्देश को मंजूरी दी है, भुगतान उसी खाते से जारी रहेगा। बदलाव मुख्य रूप से यूपीआई ऐप और भुगतान सेवा प्रदाता के स्तर पर पोर्टेबिलिटी को लेकर है। यह पता लगाना आसान होगा कि कौन-कौन से भुगतान खाते से कटने वाले हैं।
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