मातृत्व अवकाश के बाद महिला कर्मचारी को पुराना पद देना जरूरी, प्रमोशन भी नहीं रोका जा सकता
दिल्ली हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, मातृत्व अवकाश के कारण करियर में भेदभाव नहीं
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) के कारण महिला कर्मचारी को पदोन्नति, जिम्मेदारियों या करियर के अवसरों से वंचित नहीं किया जा सकता। अवकाश के बाद ड्यूटी पर लौटने वाली महिला को सामान्यतः वही पुराना पद वापस दिया जाना चाहिए, जिस पद पर वह छुट्टी पर जाने से पहले कार्यरत थी।
मातृत्व अवकाश के बाद पुराना पद देना जरूरी
मामले में एक महिला मैनेजर-अकाउंटिंग मातृत्व अवकाश पर गई थीं। छुट्टी से लौटने के बाद उन्हें ट्रेजरी डिपार्टमेंट में काम सौंप दिया गया, जबकि उनकी पुरानी जगह पर किसी अन्य कर्मचारी को बैठा दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि मातृत्व अवकाश से लौटने वाली महिला को आमतौर पर उसी पद पर वापस लाया जाना चाहिए, जिस पर वह अवकाश पर जाने से पहले कार्यरत थी।
यदि वह पद उपलब्ध नहीं है तो वेतन, ग्रेड और पदोन्नति की संभावनाओं के मामले में समान या समकक्ष पद दिया जाना चाहिए।
काम के घंटे और तरीके में बदलाव की मांग कर सकती हैं
कोर्ट ने यह भी कहा कि मातृत्व अवकाश के बाद महिला कर्मचारी अपनी परिस्थितियों को देखते हुए काम के घंटे, कार्यस्थल या काम करने के तरीके में बदलाव का अनुरोध कर सकती है। ऐसी मांग पर नियोक्ता को उचित तरीके से विचार करना होगा।
मातृत्व के आधार पर भेदभाव नहीं
फैसले में स्पष्ट किया गया कि मातृत्व सुरक्षा केवल नौकरी या वेतन बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला के करियर में आगे बढ़ने के अधिकार की भी रक्षा करती है। मातृत्व अवकाश के कारण महिला कर्मचारी के पद, जिम्मेदारियों, ग्रेड, स्टेटस या प्रमोशन के अवसरों को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सेवा शर्तों में ऐसा बदलाव नहीं किया जाना चाहिए जिससे महिला कर्मचारी को मातृत्व अवकाश लेने के कारण नुकसान हो। मातृत्व अवकाश को आधार बनाकर प्रमोशन रोकना या करियर की संभावनाओं को प्रभावित करना उचित नहीं होगा।
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