तैयारी : प्रत्येक बीमा पॉलिसी की जानकारी एक ही जगह मिलेगी

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तैयारी : प्रत्येक बीमा पॉलिसी की जानकारी एक

ही जगह मिलेगी

बीमा पॉलिसी से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए अलग-अलग कंपनियों की वेबसाइट, दस्तावेज और पोर्टल खंगालने की परेशानी जल्द कम हो सकती है। बीमा नियामक इरडा ने सार्वजनिक बीमा रजिस्ट्री (पीआईआर) बनाने का प्रस्ताव रखा है।

इसका उद्देश्य बीमा क्षेत्र के लिए एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करना है, जहां पॉलिसीधारकों को उनकी बीमा पॉलिसियों और क्लेम से जुड़ी जरूरी जानकारी एक ही जगह मिल सके। इरडा ने हाल ही में इस प्रस्ताव पर परामर्श पत्र जारी किया है। नियामक ने इस पर आम लोगों, बीमा कंपनियों और दूसरे संबंधित पक्षों से 30 सितंबर 2026 तक सुझाव मांगे हैं।

नियामक ने इस साल मार्च में पहली बार इसका प्रस्ताव रखा था। इसके जरिए अलग-अलग बीमा कंपनियों से जुड़ी जानकारी को एक मानकीकृत व्यवस्था में उपलब्ध कराने की योजना है। इसका फायदा सिर्फ ग्राहकों को ही नहीं मिलेगा, बीमा कंपनियां भी सत्यापित पॉलिसी और क्लेम संबंधी आंकड़ों का इस्तेमाल बेहतर उत्पाद तैयार करने में कर सकेंगी।

बैंक भी पॉलिसी की जानकारी देख सकेंगे

प्रस्तावित व्यवस्था का इस्तेमाल बीमा क्षेत्र के बाहर भी हो सकता है। बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान, अनुमति मिलने पर, किसी व्यक्ति की बीमा पॉलिसी के स्वामित्व और उससे जुड़े कुछ विवरणों की पुष्टि कर सकेंगे। मसलन, अगर किसी व्यक्ति ने जीवन बीमा पॉलिसी को कर्ज के लिए सुरक्षा के तौर पर दिया है तो बैंक उसके बारे में जानकारी की पुष्टि कर सकेगा।

बीमाधारकों के लिए क्या बदलेगा?

अगर प्रस्ताव लागू होता है तो किसी व्यक्ति के पास अलग-अलग कंपनियों की जीवन, स्वास्थ्य, मोटर या अन्य बीमा पॉलिसियां हैं, तो उन्हें ट्रैक करना आसान हो सकता है। प्रस्तावित रजिस्ट्री में ग्राहक को अपनी अलग-अलग कंपनियों की पॉलिसियों की एक साथ जानकारी मिल सकेगी। इसमें पॉलिसी की स्थिति, बीमा राशि, प्रीमियम, नवीनीकरण की तारीख, लाभार्थी और दावे से जुड़ी जानकारी जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं।

बार-बार दस्तावेज देने की जरूरत घटेगी

प्रस्तावित व्यवस्था से बीमा खरीदने और पॉलिसी की सेवा लेने की प्रक्रिया भी आसान हो सकती है। ग्राहक को हर बार अलग-अलग बीमा कंपनी के सामने वही जानकारी और दस्तावेज देने की जरूरत कम हो सकती है। साझा डिजिटल व्यवस्था के जरिये अधिकृत संस्थाएं पहले से उपलब्ध सत्यापित जानकारी का इस्तेमाल कर सकेंगी। इससे पॉलिसी खरीदने, उसमें बदलाव कराने और दावे की प्रक्रिया में समय कम लग सकता है।

दावों और भूली पॉलिसियों की भी जानकारी मिलेगी

इस रजिस्ट्री का एक बड़ा फायदा यह होगा कि ग्राहक अपनी अलग-अलग पॉलिसियों के दावों का इतिहास और स्थिति भी देख सकेंगे। किसी पॉलिसी धारक की मृत्यु के बाद परिवार के लोगों को अक्सर यह पता नहीं होता कि उसके नाम पर कौन-कौन सी बीमा पॉलिसियां थीं। ऐसी स्थिति में रजिस्ट्री से भूली हुई पॉलिसियों और बिना दावे वाली बीमा राशि का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

बीमा कंपनी और एजेंट की भी जांच हो सकेगी

इस व्यवस्था में केवल पॉलिसी की जानकारी रखने का प्रस्ताव नहीं है। ग्राहक यह भी जांच सकेगा कि कोई बीमा कंपनी या बीमा मध्यस्थ अधिकृत है या नहीं। इससे बीमा खरीदते समय सही कंपनी और अधिकृत एजेंट चुनने में मदद मिल सकती है। साथ ही गलत बिक्री और नियमों का उल्लंघन करने वाले एजेंट या मध्यस्थ की पहचान करना भी आसान हो सकता है।

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