फर्जी एसटी सर्टिफिकेट पर की 30 साल नौकरी, फिर भी मिलेगी पेंशन
नई दिल्ली (एजेंसी): अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाणपत्र अमान्य पाए जाने के बावजूद मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के सेवानिवृत्त जूनियर सिविल इंजीनियर शिरीष पंढरीनाथ पाटिल की पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ सुरक्षित रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए अधिकारियों को छह माह में सभी बकाये और पेंशन का भुगतान करने का निर्देश दिया।
पाटिल ने 1984 में खुद को टोकरे कोली एसटी समुदाय का बताते हुए प्रमाणपत्र लिया था, जिसके आधार पर उन्हें 1994 में बीएमसी में नियुक्ति मिली। बाद में जाति जांच समिति ने प्रमाणपत्र रद्द कर दिया और बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी इसे बरकरार रखा। इसके बावजूद अदालती कार्यवाही और अंतरिम आदेशों के चलते पाटिल ने 30 साल से अधिक समय तक सेवा की और 30 जून 2025 को सेवानिवृत्त हुए।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि प्रमाणपत्र अमान्य होने के बावजूद तीन दशक से अधिक की निर्बाध सेवा के बाद पेंशन पूरी तरह रोकना इस मामले की विशेष परिस्थितियों में उचित नहीं होगा।
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