तकनीक: न तार न टावर, आसमान से सीधे मिलेगा सुपरफास्ट इंटरनेट
देश में सैटेलाइट के जरिए तेज इंटरनेट सेवा शुरू करने की तैयारी अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। इस मामले में गठित सचिवों के समूह ने स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़ी सिफारिशों को मंजूरी दे दी है। अब प्रस्ताव को कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा, जहां से मंजूरी मिलने पर सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों के लिए व्यावसायिक सेवा शुरू करने का रास्ता साफ हो जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, डिजिटल कम्युनिकेशन आयोग (डीसीसी) की तीन सितंबर को हुई बैठक में उपग्रह संचार (सैटकॉम) पर ट्राई की सिफारिशों को मंजूरी दी गई। कंपनियों को सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए पांच वर्षों के लिए स्पेक्ट्रम आवंटित किया जाएगा। इसके बाद दो साल का विस्तार दिया जा सकता है। दूरसंचार विभाग अब कीमत और आवंटन की अंतिम मंजूरी के लिए प्रस्ताव मंत्रिमंडल को भेजेगा।
ये कंपनियां दौड़ में हैं : एलन मस्क की स्टारलिंक, भारती समूह समर्थित यूटेलसैट वनवेब और रिलायंस इंडस्ट्रीज की जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस को भारत में सैटकॉम सेवाएं शुरू करने की अनुमति मिल चुकी है। हालांकि, स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा एजेंसियों से दूसरे चरण की सुरक्षा मंजूरी के बिना ये सेवाएं शुरू नहीं की जा सकतीं। शहरी क्षेत्रों में सेवाएं देने वाली कंपनियों पर प्रति ग्राहक सालाना 500 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगाने की सिफारिश है। वहीं, सैटकॉम सेवा प्रदाताओं से सालाना 5% स्पेक्ट्रम शुल्क लेने की तैयारी है। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में यह शुल्क 4% रहेगा।
4जी या 5जी से कैसे अलग
4जी और 5जी मोबाइल नेटवर्क टावरों के जरिए काम करते हैं, जिनकी पहुंच सीमित होती है। मगर छोटे उपग्रहों के जरिए सैटेलाइट इंटरनेट के सिग्नल सीधे ग्राहकों के घर तक भेजे जाते हैं। इसमें तार या खंभों की जरूरत नहीं होती। इसके लिए बस एक खास डिश एंटीना, राउटर और इंस्टॉलेशन किट की जरूरत होती है।
1. डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। दूरदराज के छात्र भी ऑनलाइन पढ़ाई कर सकेंगे।
2. टेलीमेडिसिन और स्वास्थ्य सेवाएं ग्रामीण इलाकों तक आसानी से पहुंचेंगी।
3. किसानों को सटीक मौसम जानकारी के साथ बाजार भाव मिलेंगे।
4. छोटे व्यवसाय और स्टार्टअप भी दूरस्थ इलाकों से अपना कारोबार ऑनलाइन कर पाएंगे।
5. वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन एंटरटेनमेंट की सुविधा हर जगह उपलब्ध होगी।
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