BSA ऑफिस को नोटिस, स्कूलों-विद्यार्थियों-अटैच शिक्षकों की जानकारी न देना पड़ रहा भारी
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में अतरौली क्षेत्र के स्कूलों से जुड़ी आरटीआई की जानकारी नहीं देना जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय के जन सूचना अधिकारी को भारी पड़ रहा है। अतरौली के रहने वाले एक शख्स ने स्कूलों, विद्यार्थियों और अटैच शिक्षकों से जुड़ी जानकारी मांगी थी। समय पर सूचना नहीं मिलने पर मामला राज्य सूचना आयोग पहुंचा। अब आयोग ने जन सूचना अधिकारी को अंतिम मौका देते हुए 24 सितंबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।
आयोग ने साफ चेतावनी दी है कि अधिकारी पेश नहीं हुए या उनका जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो आरटीआई एक्ट की धारा 20 के तहत जुर्माना और विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। मामले की सुनवाई राज्य सूचना आयुक्त स्वतंत्र प्रकाश गुप्त की पीठ में हुई। बड़ा बाजार अतरौली निवासी अंशुल भारद्वाज ने 24 मई 2024 को बेसिक शिक्षा विभाग में आरटीआई दाखिल की थी।
इसमें अतरौली तहसील और नगर क्षेत्र में संचालित विद्यालयों की संख्या, उनके स्थान और प्रत्येक स्कूल में नामांकित विद्यार्थियों का विवरण मांगा गया था। आवेदन में स्कूलों में तैनात शिक्षकों और दूसरे विद्यालयों में अटैच किए गए शिक्षकों के नाम और संख्या की जानकारी भी मांगी गई थी। इसके अलावा अटैच शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेजने से संबंधित आदेश या शासनादेश की प्रमाणित प्रति मांगी गई थी। अस्थायी शिक्षक को वित्तीय चार्ज देने से जुड़े नियमों की जानकारी मांगी थी।
व्यक्तिगत रूप से देना होगा जवाब
आयोग ने 14 अगस्त और 10 सितंबर 2026 के आदेशों में जन सूचना अधिकारी को अंतिम कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही मांगी गई सभी सूचनाओं को सारणीबद्ध यानी टैबुलर फॉर्म में तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अब 24 सितंबर 2026 को सुनवाई कक्ष एस-6 में जन सूचना अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण देना होगा। आयोग ने कहा है कि अधिकारी उपस्थित नहीं हुए या जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो आरटीआई अधिनियम की धारा 20(1) के तहत प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं धारा 20 (2) के तहत विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
पहली अपील में नहीं मिली सूचना
निर्धारित समय में सूचना नहीं मिलने पर अंशुल भारद्वाज ने 11 जुलाई 2024 को प्रथम अपील की। वहां से भी जानकारी नहीं मिलने पर 22 अक्टूबर 2024 को राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील/शिकायत दाखिल की गई। मामले में आयोग ने जन सूचना अधिकारी को कई बार नोटिस जारी कर पक्ष रखने और मांगी गई सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। 6 अप्रैल, 11 जून और 28 जुलाई 2026 को जारी नोटिस के बावजूद अधिकारी न तो उपस्थित हुए और न ही सूचना उपलब्ध कराई। आयोग ने इसे गंभीरता से लिया।
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