परिषदीय विद्यालयों में शिक्षण अवधि पुनः 5 घंटे किए जाने की आवश्यकता, कोविड के समय हुआ था बदलाव
कोविड के बाद उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के विद्यालय में रहने की अवधि लगभग एक घंटे बढ़ा दी गई थी। उस समय की परिस्थितियों को देखते हुए यह व्यवस्था उचित रही होगी, लेकिन अब स्थिति सामान्य हो चुकी है। इसलिए इस अतिरिक्त समय की उपयोगिता पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।*
*विशेष रूप से प्राथमिक कक्षाओं के छोटे बच्चों के लिए लगातार छह घंटे विद्यालय में रहना उनकी आयु, मानसिक एकाग्रता और शारीरिक क्षमता की दृष्टि से उचित नहीं लगता। बच्चों को लंबे समय तक बैठाए रखने के बजाय कम समय में प्रभावी, आनंददायक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना अधिक आवश्यक है।*
*कई विद्यालयों में निर्धारित समय पूरा करने के दबाव के कारण शिक्षक और बच्चे तय अवधि से अधिक समय तक विद्यालय में रुकते हैं। इससे बच्चों पर अनावश्यक दबाव पड़ता है और उनकी सहज सीखने की प्रक्रिया प्रभावित होती है।*
*इसलिए उत्तर प्रदेश में प्राथमिक स्तर के बच्चों की आयु, सीखने की क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए विद्यालय की शिक्षण अवधि पुनः पाँच घंटे किए जाने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।*
*बच्चों को अधिक समय तक बैठाए रखना शिक्षा की गुणवत्ता का प्रमाण नहीं है। उन्हें उचित अवधि में बेहतर ढंग से सीखने का अवसर देना ही वास्तविक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा है।*
*उत्तर प्रदेश सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग से विनम्र अनुरोध है कि इस विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए प्राथमिक कक्षाओं के लिए पाँच घंटे की संतुलित, बाल-अनुकूल और प्रभावी विद्यालयी अवधि लागू करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएं।*
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