UP fake teacher scam: बेसिक शिक्षा विभाग में एक ही शैक्षिक प्रमाणपत्र (मार्कशीट) का इस्तेमाल कर 10-10 शिक्षकों की फर्जी नियुक्तियों के खुलासे ने पूरी प्रणाली को हिलाकर रख दिया है। इस बड़े फर्जीवाड़े और कूटरचित दस्तावेजों के खेल पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है।
न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने कक्षा 1 से 8 तक के स्कूलों में तैनात सभी परिषदीय शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की गहन जांच कराने का सख्त आदेश दिया है। इस जांच की निगरानी शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ एसटीएफ (STF) करेगी।
क्या हैं हाईकोर्ट के निर्देश?
एक सप्ताह का अल्टीमेटम : सभी शिक्षकों को एक सप्ताह के भीतर अपने नियुक्ति पत्र और शैक्षणिक दस्तावेज संबंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) के समक्ष जमा करने होंगे।
रिश्तेदारों का ब्योरा देना अनिवार्य : शिक्षकों को एक नोटरी शपथ पत्र भी प्रस्तुत करना होगा, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि उनके कौन-कौन से रिश्तेदार शिक्षा विभाग में BSA या उससे उच्च पदों पर कार्यरत हैं या सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
4 नवंबर को अगली सुनवाई : कोर्ट ने अधिकारियों को 4 नवंबर तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। फर्जी नियुक्तियों को रद्द करने, अवैध रूप से उठाए गए वेतन की वसूली और इसमें संलिप्त अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई पर कोर्ट अगली सुनवाई पर विचार करेगा।
ऐसे खुला फर्जीवाड़े का खेल
संतकबीरनगर निवासी कुसुमलता ने अपनी नियुक्ति की मंजूरी और बकाया वेतन जारी कराने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन जांच के दौरान एसटीएफ लखनऊ ने बड़ा खुलासा किया। याची ने गोरखपुर के बरईपार कंपोजिट प्राथमिक विद्यालय में तैनात वास्तविक शिक्षिका ‘कुसुमलता श्रीवास्तव’ के असली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी से नौकरी हासिल की थी।
एसटीएफ द्वारा 12 और 13 अक्तूबर को सत्यापन के लिए बुलाए जाने पर भी याची उपस्थित नहीं हुई। सुनवाई के दौरान सामने आया कि यह कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि पिछले दो दशकों से एक ही डिग्री पर 10 या उससे अधिक लोगों को नौकरी दिलाने का संगठित नेटवर्क चल रहा है।
हाईकोर्ट की तल्क टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार भले ही मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और मिड-डे मील पर करोड़ों खर्च कर दे, लेकिन फर्जी डिग्री से शिक्षक बने लोग बच्चों का भविष्य कभी नहीं संवार सकते। सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या और शिक्षा के गिरते स्तर का मुख्य कारण शिक्षकों की अयोग्यता और फर्जीवाड़ा है।
गोपनीय पत्र लीक होने से बढ़ा संकट
एसटीएफ के इनपुट के अनुसार राज्य में 10,000 से अधिक शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध हैं। वर्ष 2020 में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अनामिका शुक्ला के नाम पर एक साथ कई जिलों में नौकरियां हथियाने का मामला सामने आया था। जून 2022 में एसटीएफ ने 35 से अधिक जिलों के 228 संदिग्ध शिक्षकों की सूची सौंपी थी, लेकिन गोपनीय पत्र लीक होने, एफआईआर में देरी और बिहार, मध्य प्रदेश तथा आगरा विश्वविद्यालयों से सत्यापन में लगने वाले वर्षों के समय के कारण कार्रवाई प्रभावित हुई।
इस बीच, इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब बेसिक शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है और पिछले दो दशकों से चल रहे फर्जीवाड़ा रैकेट का पर्दाफाश होना तय माना जा रहा है।
Basic Shiksha Khabar | PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News | Primarykamaster | Updatemarts | Primary Ka Master | Basic Shiksha News | Uptet News | primarykamaster | SHIKSHAMITRA
