मिड-डे मील में बड़ा खेल? रसोइयों की नियुक्ति से लेकर बच्चों की थाली तक पर उठे सवाल, शासनादेशों पर प्राधिकरण ने दिया चौंकाने वाला जवाब!
लखनऊ/झांसी। परिषदीय विद्यालयों में मध्याह्न भोजन (MDM) योजना से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों को लेकर मध्याह्न भोजन प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश के एक पत्र ने नई चर्चा छेड़ दी है। सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में प्राधिकरण ने रसोइयों की नियुक्ति एवं कार्य, उनकी सेवानिवृत्ति आयु, बच्चों के बर्तन धुलवाने तथा पल्स पोलियो दिवस पर मध्याह्न भोजन बनाने से संबंधित शासनादेशों की उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट की है।
रसोइयों की नियुक्ति पर शासनादेश का हवाला
प्राधिकरण की ओर से 21 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में बताया गया है कि रसोइयों की नियुक्ति एवं कार्य विषयक विस्तृत दिशा-निर्देश शासनादेश संख्या 435(1)/79, दिनांक 24 अप्रैल 2010 के अनुसार जारी किए गए हैं। संबंधित शासनादेश प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होने की जानकारी भी दी गई है।
सेवानिवृत्ति आयु से संबंधित शासनादेश उपलब्ध नहीं
आरटीआई के जवाब में प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि रसोइयों की सेवानिवृत्ति आयु से संबंधित कोई शासनादेश प्राधिकरण स्तर पर उपलब्ध नहीं है। इस जवाब के बाद रसोइयों की सेवानिवृत्ति आयु से जुड़े नियमों को लेकर संबंधित शासनादेश की जानकारी महत्वपूर्ण हो गई है।
बच्चों से थाली धुलवाने पर भी मांगा गया जवाब
परिषदीय विद्यालयों में बच्चों से भोजन के बाद थाली अथवा गिलास धुलवाने के संबंध में भी सूचना मांगी गई थी। इस पर प्राधिकरण ने बताया कि इस विषय से संबंधित कोई शासनादेश उसके स्तर पर उपलब्ध नहीं है।
पल्स पोलियो दिवस पर MDM बनाने के नियम पर भी जानकारी नहीं
सूचना में पल्स पोलियो दिवस के दौरान मध्याह्न भोजन बनाए जाने के संबंध में शासनादेश की जानकारी भी मांगी गई थी। प्राधिकरण ने इस विषय पर भी अपने स्तर पर कोई शासनादेश उपलब्ध न होने की बात कही है।
अब संबंधित शासनादेशों पर निगाहें
यह पत्र झांसी के सीपरी बाजार निवासी डॉ. रहबर सुल्तान को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत उपलब्ध कराई गई जानकारी के संदर्भ में जारी किया गया है। पत्र पर जनसूचना अधिकारी संजय कुमार शुक्ला के हस्ताक्षर हैं।
प्राधिकरण के जवाब से स्पष्ट है कि मांगे गए चार बिंदुओं में नियुक्ति एवं कार्य से संबंधित शासनादेश का उल्लेख किया गया है, जबकि अन्य तीन विषयों पर प्राधिकरण स्तर पर शासनादेश उपलब्ध न होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, प्राधिकरण स्तर पर शासनादेश उपलब्ध न होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि संबंधित विषय पर शासन या किसी अन्य विभाग की ओर से कोई नियम अथवा आदेश जारी ही नहीं किया गया है।
अब इन मामलों में संबंधित विभागों और शासन स्तर से उपलब्ध नियमों की जानकारी सामने आना महत्वपूर्ण होगा, ताकि रसोइयों के अधिकारों और विद्यालयों में बच्चों से जुड़े विषयों पर स्थिति स्पष्ट हो सके।
Basic Shiksha Khabar | PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News | Primarykamaster | Updatemarts | Primary Ka Master | Basic Shiksha News | Uptet News | primarykamaster | SHIKSHAMITRA





