दिल टूटने से दिल पर पड़ सकता है असर! क्या है Broken Heart Syndrome, जानें लक्षण
Heart Health News: अक्सर कहा जाता है कि दिल टूटने से इंसान अंदर से बिखर जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि किसी प्रियजन की मृत्यु, रिश्ते टूटने, गहरे दुख, डर या अचानक भावनात्मक तनाव का असर दिल की कार्यप्रणाली पर भी पड़ सकता है? चिकित्सा विज्ञान में ऐसी स्थिति को ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम (Broken Heart Syndrome) कहा जाता है। इसे मेडिकल भाषा में टाकोत्सुबो कार्डियोमायोपैथी (Takotsubo Cardiomyopathy) भी कहते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक भावनात्मक या शारीरिक तनाव के बाद कुछ लोगों के हृदय की मांसपेशियां अस्थायी रूप से कमजोर हो सकती हैं। इसके लक्षण कई बार हार्ट अटैक जैसे दिखाई देते हैं। इसलिए सीने में दर्द या सांस लेने में परेशानी होने पर इसे केवल तनाव समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
क्या है ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम?
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है, जिसमें अचानक अत्यधिक भावनात्मक या शारीरिक तनाव के बाद हृदय की मांसपेशियों का एक हिस्सा अस्थायी रूप से कमजोर हो जाता है। इससे हृदय की रक्त पंप करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
किसी करीबी की मृत्यु, रिश्ते का टूटना, अचानक डर, गंभीर बीमारी या अन्य तनावपूर्ण घटनाएं इसके संभावित ट्रिगर हो सकते हैं। कुछ मामलों में शारीरिक तनाव या गंभीर बीमारी के बाद भी यह स्थिति विकसित हो सकती है।
हालांकि, हर व्यक्ति जो दुख, गुस्सा या तनाव महसूस करता है, उसे यह समस्या नहीं होती। इसके पीछे के सटीक कारणों पर अभी भी शोध जारी है।
भावनात्मक तनाव दिल को कैसे प्रभावित करता है?
अत्यधिक तनाव के दौरान शरीर में एड्रेनालिन और अन्य तनाव-संबंधी हार्मोन का स्तर तेजी से बढ़ सकता है। कुछ लोगों में यह प्रतिक्रिया हृदय की मांसपेशियों को प्रभावित कर सकती है।
इसके परिणामस्वरूप हृदय का कुछ हिस्सा सामान्य तरीके से सिकुड़ नहीं पाता और रक्त पंप करने की क्षमता अस्थायी रूप से कम हो सकती है। इसे ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम कहा जाता है।
कोलकाता के बीएम बिड़ला हार्ट हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विशेषज्ञों के हवाले से प्रकाशित समाचार में बताया गया है कि तनाव से जुड़े हार्मोन और उनकी तीव्र प्रतिक्रिया हृदय पर असर डाल सकती है।
हार्ट अटैक और ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम में क्या अंतर है?
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम और हार्ट अटैक के लक्षण काफी हद तक समान हो सकते हैं। दोनों ही स्थितियों में सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी और कमजोरी महसूस हो सकती है।
लेकिन दोनों के कारण अलग हो सकते हैं। हार्ट अटैक आमतौर पर हृदय की मांसपेशियों तक रक्त पहुंचाने वाली कोरोनरी धमनी में रुकावट के कारण होता है। वहीं, ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम में हृदय की पंपिंग क्षमता अस्थायी रूप से प्रभावित होती है और अक्सर कोरोनरी धमनियों में ऐसी रुकावट नहीं मिलती, जो हार्ट अटैक की व्याख्या कर सके।
इन दोनों स्थितियों में अंतर केवल लक्षणों के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए डॉक्टर ECG, रक्त जांच, इकोकार्डियोग्राफी और जरूरत पड़ने पर अन्य जांच कर सकते हैं।
हार्ट अटैक जैसे लक्षण दिखें तो क्या करें?
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम में भी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। इसलिए निम्नलिखित लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें:
सीने में अचानक दर्द, दबाव या जकड़न।
सांस लेने में परेशानी।
ठंडा पसीना आना।
चक्कर आना या बेहोशी महसूस होना।
अचानक अत्यधिक कमजोरी या बेचैनी।
यदि ये लक्षण अचानक शुरू हों, तो तुरंत स्थानीय आपातकालीन चिकित्सा सेवा से संपर्क करें। भारत में आपातकालीन सहायता के लिए 112 पर कॉल किया जा सकता है। स्वयं से यह तय करने की कोशिश न करें कि समस्या तनाव के कारण है या हार्ट अटैक के कारण।
क्या ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम ठीक हो सकता है?
कई मरीजों में उचित चिकित्सा देखभाल के बाद हृदय की पंपिंग क्षमता कुछ दिनों से लेकर कुछ सप्ताह में बेहतर हो सकती है। हालांकि, हर मरीज की स्थिति अलग होती है और कुछ लोगों में गंभीर जटिलताएं भी हो सकती हैं।
डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार, निगरानी और फॉलो-अप की सलाह देते हैं। दोबारा समस्या होने की संभावना भी पूरी तरह समाप्त नहीं मानी जा सकती।
भावनात्मक तनाव को नजरअंदाज न करें
जीवन में दुख, डर, गुस्सा और तनाव सामान्य अनुभव हैं, लेकिन लगातार तनाव का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। नियमित नींद, संतुलित आहार, शारीरिक गतिविधि, परिवार और दोस्तों का सहयोग तथा जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेना उपयोगी हो सकता है।
फिर भी यह याद रखना जरूरी है कि तनाव महसूस करना अपने आप में ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम का प्रमाण नहीं है। यदि तनाव के साथ सीने में दर्द या सांस लेने में परेशानी हो, तो इसे भावनात्मक प्रतिक्रिया मानकर टालना खतरनाक हो सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। यह डॉक्टर की सलाह, जांच या उपचार का विकल्प नहीं है।
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