शामली। जनपद के 596 परिषदीय विद्यालयों में सत्र परीक्षा 18 सितंबर से शुरू हो गई है, लेकिन विद्यालयों को ना तो प्रश्नपत्र मिले है और ना ही उत्तर पुस्तिका। शिक्षक निजी खर्च से प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका खरीदकर या फिर श्यामपट पर प्रश्न लिखकर परीक्षा करवा रहे हैं।
शासन हर तीसरे माह में सत्र परीक्षा कराने का परिषदीय विद्यालयों को निर्देश देता है, लेकिन इसके लिए कोई भी बजट आवंटित नहीं किया गया है। शिक्षकों को अपने जेब खर्च से परीक्षा करानी पड़ रही है। शुक्रवार को बच्चों ने कहीं श्यामपट पर लिखे प्रश्नों को देखकर उत्तर पुस्तिका में लिखा तो कहीं एक ही प्रश्नपत्र के सहारे दर्जनों बच्चे प्रश्न लिखते हुए दिखाई दिए।
केस-1
गांव सिंभालका में कक्षा में सामाजिक विषय का प्रश्नपत्र श्यामपट पर उतार रखा था, वहीं उत्तर पुस्तिका के स्थान पर बच्चों ने अपनी कापी के पेज पर ही उनके प्रश्न उतारकर उनके उत्तर लिखे। इंचार्ज प्रधानाध्यापक कमलेश ने बताया कि कल तक उत्तर पुस्तिका आने की उम्मीद है।
केस-2
प्राथमिक विद्यालय नंबर 13 में हिंदी की परीक्षा हुई। प्रश्नपत्र हाथ से लिखकर उनकी फोटो स्टेट कराई गई थी। प्रधानाध्यापिका ने बताया कि इसका कोई बजट नहीं मिलता है, उन्होंने पास से ही यह सब व्यवस्था कराई है।
परीक्षा कराने के बाद परीक्षा में आया हुआ खर्च प्रधानाध्यापकों के खाते में शासन से भेजा जाता है, जबकि पहले से ही कापी व पेपर खरीदने का कोई भी व्यवस्था शासन से नहीं है। – लता राठौर, बीएसए
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