बुलंदशहर: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का साबितगढ़ गांव, जिसे ‘मास्टरों का गांव’ भी कहा जाता है, एक अनोखी पहचान रखता है. इस गांव ने अब तक लगभग 100 से अधिक शिक्षक दिए हैं, जिनमें प्राइमरी स्कूल के शिक्षक से लेकर प्रधानाध्यापक तक शामिल हैं. पहासू कस्बे का यह गांव अपने पूर्वजों की शिक्षा के प्रति समर्पण की परंपरा को कायम रखे हुए है, और आज भी यहां की नई पीढ़ी शिक्षक बनने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है.
इस गांव में शिक्षा का माहौल इतना समृद्ध है कि यहां तीन कॉलेज भी स्थापित हैं, जो विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा की ओर प्रेरित करते हैं. यहां के बच्चे मुख्य रूप से शिक्षक बनने का सपना देखते हैं और उसी दिशा में आगे बढ़ते हैं. गांव के कई पुरुष और महिलाएं आज भी सरकारी सेवा में हैं, जबकि कुछ रिटायर हो चुके हैं. लगभग 70 लोग वर्तमान में सरकारी शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं, जिसमें पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं की भी महत्वपूर्ण भागीदारी है.
महिलाओं की भागीदारी
गांव की महिलाएं भी शिक्षा और सरकारी सेवा में पीछे नहीं हैं. पुरुषों के बराबर संख्या में महिलाएं भी शिक्षक और अन्य सरकारी पदों पर सेवा दे रही हैं. रिटायर्ड टीचर सुशीला देवी बताती हैं कि साबितगढ़ गांव में करीब 100 सरकारी शिक्षक हैं. यह गांव अपने शिक्षकों की संख्या के मामले में जिले में अग्रणी है, और यहां की कुल जनसंख्या लगभग 2000 है, जो मुख्य रूप से ब्राह्मण समुदाय से संबंधित है.
अन्य क्षेत्रों में योगदान
गांव के बच्चे केवल शिक्षक ही नहीं बन रहे, बल्कि इंजीनियर, डॉक्टर और प्रशासनिक सेवाओं में भी जा रहे हैं. वर्तमान में इस गांव के लगभग 60 से 70 बच्चे गेस्ट टीचर, ट्यूटर, और स्पेशल एजुकेटर के रूप में कार्य कर रहे हैं, जो साबितगढ़ की शैक्षिक संस्कृति को और मजबूत कर रहे हैं.
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