….तो राजकीय इंटर कॉलेजों में पढ़ाएंगे परिषदीय स्कूलों के शिक्षक

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 ….तो राजकीय इंटर कॉलेजों में पढ़ाएंगे परिषदीय स्कूलों के शिक्षक

लखनऊ: मुरादाबाद में राजकीय इंटर

कॉलेजों में शिक्षक कम हैं। ऐसे में छात्रों का कोर्स पूरा करवाने के लिए अब बेसिक शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। डीएम के निर्देश पर वहां के जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) और बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने 25 शिक्षकों की लिस्ट भी जारी की है। ये शिक्षक इस सत्र के अंत तक राजकीय हाईस्कूलों और इंटर कॉलेजों में एक पीरियड रोजाना लेंगे। राजकीय इंटर कॉलेजों में शिक्षकों की कमी का यह आलम सिर्फ मुरादाबाद में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश का ऐसा ही हाल है। कई कॉलेज तो ऐसे हैं जहां शिक्षकों की स्थायी तैनाती की ही नहीं गई। दूसरे कॉलेजों से शिक्षक संबद्ध करके किसी तरह स्कूल चलाए जा रहे हैं।

शिक्षकों के 50% पद खाली

प्रदेश में कुल 2,500 राजकीय हाईस्कूल और राजकीय इंटर कॉलेज हैं। इनमें करीब 22,000 शिक्षकों के पद हैं, लेकिन वर्तमान में तैनात शिक्षकों की संख्या 11,900 है। कुल मिलाकर लगभग 50% शिक्षकों के पद खाली हैं। इनमें भी कुछ स्कूलों में काफी शिक्षक है और कुछ में शिक्षकों की संख्या बहुत कम है। जहां शिक्षक नहीं हैं या जहां बहुत कम हैं, वहां दूसरे स्कूलों से शिक्षकों को संबद्ध करके स्कूल संचालित किए जा रहे हैं।

यहां भी जुगाड़ का सहारा

राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर पांडेय बताते हैं कि प्रयागराज का राजकीय इंटर कॉलेज देवघाट घूस 2022 में शुरू हुआ लेकिन यहां आज तक एक भी शिक्षक की स्थायी तैनाती नहीं की गई। कक्षा छह से 12 तक कॉलेज चलता है, लेकिन यहां कुल तीन शिक्षक अलग अलग कॉलेजों से हटाकर संबद्ध किए गए हैं। इसी तरह बांदा के राजकीय इंटर कॉलेज, पैलानी में 1,200 छात्र हैं। यह

काफी पुराना इंटर कॉलेज है, लेकिन यहां सिर्फ एक प्रिंसिपल और तीन शिक्षक हैं। ललितपुर के राजकीय इंटर कॉलेज, चंदन नगर में 850 छात्र हैं। बिना प्रिंसिपल के इस कॉलेज में महज दो शिक्षक तैनात हैं। इस तरह प्रदेश में कई कॉलेज हैं, जहां शिक्षकों का इसी तरह टोटा है।

क्यों आई यह नौबत ?

दरअसल, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (RMSA) लागू होने के बाद केंद्र के सहयोग से हर साल नए राजकीय हाईस्कूल और इंटर कॉलेज खुल रहे हैं। प्रदेश में 2010 तक करीब 1,000

राजकीय हाईस्कूल और इंटर कॉलेज थे। RMSA लागू होने के बाद 14 साल में 1,489 नए हाईस्कूल और इंटर कॉलेज खुल गए। स्कूलों की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा हो गई। उस अनुपात में शिक्षकों की भर्ती हुई नहीं। राजकीय शिक्षकों की आखिरी भर्ती 2018 में हुई थी, उनको ही 2023 तक तैनाती दी गई है। हर साल शिक्षक रिटायर भी हो रहे हैं। यही वजह है कि जितने शिक्षकों की जरूरत है, उसके आधे ही शिक्षक हैं।

….तो राजकीय इंटर कॉलेजों में पढ़ाएंगे परिषदीय स्कूलों के शिक्षक

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