सर्वेः अनपढ़ लोग गंभीर अपराध शिक्षित नशे के कारोबार में आगे
नई दिल्ली। देश में जहां अनपढ़ और कम पढ़े लिखे लोग गंभीर किस्म के अपराधों को अंजाम दे रहे हैं, वहीं अधिक पढ़े लिखे व्यक्ति नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध हथियार संबंधी अपराध में सबसे आगे हैं। हालांकि शिक्षित लोग गंभीर किस्म के अपराधों को भी अंजाम दे रहे हैं।
इसका खुलासा, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) दिल्ली द्वारा देश की जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों के लिए आसानी से न्याय तक पहुंच की प्रभावकारिता को जानने के लिए किए गए सर्वे में हुआ। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय को सौंपी गई एनएलयू की रिपोर्ट में कहा गया कि शिक्षा का अपराध और इसकी प्रकृति से सीधा संबंध है। रिपोर्ट पर 18.4 फीसदी छोटे-मोटे अपराध और में कहा कि देश की जेलों में सबसे
अधिक 51.3% अनपढ़ विचाराधीन कैदी बंद हैं। इनमें से 68.9% पर गंभीर किस्म के बड़े अपराध, जबकि 22.3% पर छोटे-मोटे अपराध का आरोप है। वहीं 7% लोग नशीले पदार्थों की तस्करी के जुर्म में कैद में हैं।
जेलों में 24 फीसदी कैदी 10वीं पासः रिपोर्ट में कहा गया कि जेलों में बंद कुल कैदियों का 24 फीसदी दसवीं
पास है व 9.4% 12 वीं कक्षा, 12.4% स्नातक तक पढ़े हैं। जबकि 1.3% पोस्ट ग्रेजुएट और 1.7% पीएचडी डिग्री धारक भी कैदी हैं। 10 वीं कक्षा तक पढ़े विचाराधीन कैदियों में से 35% छोटे- मोटे अपराध, 48% गंभीर अपराध के आरोप में बंद हैं। जबकि 12.7% नशीले पदार्थों की तस्करी और 4.1% अवैध हथियार रखने के जुर्म में मुकदमों का सामना कर रहे हैं।
18.4% विचाराधीन कैदी डिग्री धारक
रिपोर्ट में कहा गया कि जेलों में बंद स्नातक से लेकर पीएचडी तक की डिग्री धारक कुल विचाराधीन कैदियों में से 18.4% नशीले पदार्थों और 24.1% अवैध हथियारों से जुड़े अपराधों में बंद हैं। हालांकि इस श्रेणी के विचाराधीन कैदियों
39.1% पर गंभीर किस्म के बड़ी वारदातों में शामिल होने का भी आरोप है।
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