बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के 1.20 लाख से अधिक पद खाली होने के बावजूद भर्ती शुरू होने के आसार नहीं नजर आ रहे। विधानसभा के वर्तमान सत्र में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने मंगलवार को विधायक किशनी ब्रजेश कठेरिया के प्रश्न के दिए जवाब में साफ किया है कि शिक्षक-छात्र अनुपात पूर्ण है। शिक्षामित्रों की संख्या जोड़ने के बाद आरटीई मानक के अनुरूप प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की आवश्यकता नहीं है।
मंत्री ने जवाब दिया है कि प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के स्वीकृत कुल 417886 पदों के सापेक्ष 79296 रिक्त हैं। इनमें 57405 पद सीधी भर्ती के और 21891 पद पदोन्नति के हैं। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में स्वीकृत 162198 पदों के सापेक्ष 41338 पद रिक्त हैं और ये सभी पद पदोन्नति के हैं। प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अध्यापक 338590 एवं छात्र नामांकन 1,04,93,389 के सापेक्ष छात्र-शिक्षक अनुपात 301 एवं 143450 शिक्षामित्र को जोड़ने पर छात्र-शिक्षक अनुपात 221 है जो मानक के अनुसार पूर्ण है।
उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अध्यापक 120860 और छात्र नामांकन 4314803 के सापेक्ष छात्र-शिक्षक अनुपात 351 है। इसमें 25223 अनुदेशक की संख्या शामिल कर ली जाए तो छात्र और शिक्षक अनुपात 291 है जो मानक के अनुसार पूर्ण है।
चयन आयोग को नहीं भेजे रिक्त पद
बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर लंबे समय से परिषदीय स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात मानक के अनुसार बता रहे हैं। यही कारण है नवगठित उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को रिक्त पदों का ब्योरा नहीं भेजा जा रहा। परिषदीय विद्यालयों में 2018 के बाद से कोई भर्ती नहीं आई है। डीएलएड प्रशिक्षण पूरा कर चुके बेरोजगार नौकरी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन विभाग भर्ती निकालने को तैयार नहीं है। नवगठित आयोग की अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय ने दो बार सभी अफसरों के साथ बैठक कर रिक्त पदों का ब्योरा मांगा है लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई है।
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