होली और होलिका दहन में एक दिन का अंतर, यूपी में इस दिन मनेगा त्योहार; अलर्ट पर प्रशासन – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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 होली के मद्देनजर यूपी में प्रशासन और पुलिस अलर्ट पर है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने त्योहार पर रंग में भंग डालने वालों से कड़ाई से निपटने के आदेश दिए हैं। इस बार होलिका दहन और होली खेलने के दिन में एक दिन का अंतर है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इस बार होलिका दहन पर भद्रा और चंद्र ग्रहण का साया रहेगा। इसलिए होलिका दहन दो मार्च को होगा, जबकि भद्रा और चंद्रग्रहण लगने की वजह से तीन मार्च को होली नहीं खेली जाएगी। चार मार्च को होली खेलना शुभ माना जा रहा है।

ज्योतिर्विद डॉ. पं. दिवाकर त्रिपाठी ने बताया कि भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि, होलिका दहन के लिए उत्तम मानी जाती है। यदि भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा का अभाव हो परंतु भद्रा मध्य रात्रि से पहले ही समाप्त हो जाए तो प्रदोष के बाद जब भद्रा समाप्त हो, शास्त्रों के अनुसार तब होलिका दहन करना चाहिए। यदि भद्रा मध्य रात्रि तक हो तो ऐसी परिस्थिति में भद्रा पुच्छ के दौरान होलिका दहन किया जा सकता है। परंतु भद्रा मुख में होलिका दहन करना उचित नहीं माना जाता है।

 ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि काशी के ऋषिकेष पंचांग अनुसार दो मार्च को पूर्णिमा तिथि शाम 05:18 बजे से शुरू होकर तीन मार्च की शाम 04:33 बजे तक रहेगी। वहीं, भद्रा दो मार्च की शाम 05:18 बजे से सुबह 4:56 बजे तक रहेगी। होलिका दहन दो मार्च को भद्रा पुच्छ में रात 12:50 से रात 02:02 बजे तक या भद्रा समाप्त होने के बाद सुबह 4:56 बजे के बाद भद्रारहित काल में भी होलिका दहन करना श्रेष्ठ है।

साल का पहला चंद्रग्रहण तीन मार्च को पड़ रहा

आचार्य पं. आनंद दुबे ने बताया कि स्नान दान के लिए पूर्णिमा तिथि तीन मार्च है। इस साल का पहला चंद्रग्रहण भी तीन मार्च को ही पड़ रहा है। यह एक ग्रस्तोदय चंद्र ग्रहण होगा, जो भारत के कुछ हिस्सों में दिखेगा। ग्रहण दोपहर 03:21 बजे शाम 06:46 बजे तक रहेगा। तीन मार्च को सूतक सुबह 09:20 बजे से शाम 06:46 बजे तक करीब नौ घंटे तक का रहेगा। ज्योतिषाचार्य पं. रवि प्रकाश मिश्रा ने बताया कि ऑनलाइन द्रिक पंचांग अनुसार पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ दो मार्च की शाम 05:55 बजे से होगा।

 गुरुद्वारों में होला महल्ला का आयोजन चार को

गुरुद्वारों में चार मार्च को होला महल्ला श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा। शुरुआत गुरु गोविंद सिंह ने सिखों में वीरता का रस भरने के लिए की थी। यहियागंज गुरुद्वारा के सचिव मनमोहन सिंह हैप्पी ने बताया कि होला महल्ला के पर्व पर एक-दूसरे पर फूल तथा गुलाल फेंका जाता है। निहंग सिंह गतके का बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं। यहियागंज गुरुद्वारा में चार मार्च की शाम सात बजे से रात 11 बजे और पांच मार्च की सुबह पांच से शाम पांच बजे तक होला महल्ला मनाया जाएगा।

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