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शिक्षक नियुक्ति में न्यूनतम योग्यता का नियम: सेवा में बने रहने से अलग है प्रावधान

शिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए है न कि सेवा में बने रहने वास्ते और फिर केंद्र सरकार ने योग्यता में शिथिलता प्रदान की थी जहां प्रशिक्षण प्रदान करने वाली पर्याप्त संस्थाएं न हो वहां के लिए जबकि यू पी में ऐसी कोई कमी नहीं थी 2011के बाद बिना टेट किसी की नियुक्ति नहीं हुई है और यदि हुई भी हो तो उन्हें 31मार्च 2015 तक 2017में जिसे 31मार्च 2019तक समय सीमा विस्तार किया गया था

शिक्षक भर्ती से जुड़े नियमों को लेकर समय-समय पर कई तरह की भ्रांतियां सामने आती रही हैं। विशेष रूप से न्यूनतम शैक्षिक योग्यता और टीईटी (Teacher Eligibility Test) से जुड़े प्रावधानों को लेकर स्पष्टता जरूरी है। हाल ही में इस विषय पर फिर चर्चा तेज हुई है कि क्या यह नियम सेवा में बने रहने के लिए है या केवल नियुक्ति के लिए लागू होता है।

दरअसल, अधिनियम की धारा 23(1) में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि शिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए वही व्यक्ति पात्र होगा, जिसके पास केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित न्यूनतम योग्यता होगी। यानी यह प्रावधान नियुक्ति (Recruitment) से संबंधित है, न कि पहले से कार्यरत शिक्षकों की सेवा समाप्त करने से।

धारा 23(2) में यह भी प्रावधान दिया गया है कि यदि किसी राज्य में शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों की कमी हो या आवश्यक योग्यताधारी शिक्षक पर्याप्त संख्या में उपलब्ध न हों, तो केंद्र सरकार अधिकतम 5 वर्ष तक के लिए न्यूनतम योग्यता में शिथिलता (Relaxation) दे सकती है। यह व्यवस्था केवल उन राज्यों के लिए थी जहां संसाधनों की कमी थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में प्रशिक्षण संस्थानों की कोई विशेष कमी नहीं थी। यही कारण है कि वर्ष 2011 के बाद बिना टीईटी किसी भी शिक्षक की नियमित नियुक्ति नहीं की गई। यदि कहीं अपवाद स्वरूप नियुक्तियां हुई भी हों, तो उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर योग्यता पूरी करनी थी।

सरकार द्वारा ऐसे शिक्षकों को पहले 31 मार्च 2015 तक और बाद में विस्तार देते हुए 31 मार्च 2019 तक टीईटी या अन्य आवश्यक योग्यताएं प्राप्त करने का अवसर दिया गया था। यह अवधि उन शिक्षकों के लिए थी, जिन्हें शिथिलता के तहत नियुक्त किया गया था।

स्पष्ट है कि शिक्षक भर्ती में न्यूनतम योग्यता अनिवार्य है और यह नियम नियुक्ति प्रक्रिया के लिए बनाया गया है। वहीं, योग्यता में दी गई शिथिलता एक अस्थायी व्यवस्था थी, जिसे विशेष परिस्थितियों में ही लागू किया गया था।

इस पूरे प्रावधान का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना और योग्य शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करना है, न कि सेवा में कार्यरत शिक्षकों के अधिकारों को प्रभावित करना।

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