लखनऊ। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों से जल्द ही एनजीओ (गैर सरकारी संगठनों) की भूमिका पूरी तरह से खत्म होगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के कड़े निर्देश के बाद यूपी समेत 27 राज्यों व तीन केंद्र शासित प्रदेशों में संचालित केजीबीवी से एनजीओ को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।
दरअसल एनजीओ को लेकर पिछले कई सालों से मिल रही गम्भीर शिकायतों एवं बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध के मद्देनजर केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों को नोटिस भेजकर उनसे इस बारे में कार्रवाई रिपोर्ट तलब की है।
यूपी में भी केजीबीवी के संचालन में एनजीओ का बहुत अधिक दखल है। केजीबीवी में एनजीओ अभी राशन की आपूर्ति से लेकर, नॉन टीचिंग स्टॉफ, मेंटीनेंस आदि का काम कर रहे हैं। यूपी में इस समय कुल 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का संचालन हो रहा है। इस बीच केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा केजीबीवी में एनजीओ को लेकर राज्यों को भेजी गई नोटिस से खलबली मची हुई है। कारण सबसे ज्यादा नुकसान ठेके पर स्कूलों का संचालन कर रहे एनजीओ को होगा।
जानकारों की माने तो अकेले उत्तर प्रदेश में ही दर्जन भर ऐसे एनजीओ हैं जो कस्तूरबा विद्यालयों का संचालन करा रहे हैं। लगातार शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए पहली बार शिक्षा मंत्रालय ने देश के राज्यों से लिस्ट मांगी है। यही नहीं शिक्षा मंत्रालय ने शिक्षकों की योग्यता और वेतन संरचना के बारे में विवरण प्रस्तुत करने को कहा है।
दो दर्जन केजीबीवी में है एनजीओ का दखल
तमाम विरोधों के बाद यूपी में कई जिलों के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों से एनजीओं को हटा दिया गया, फिर भी अभी करीब दो दर्जन जिलों में एनजीओ की दखलंदाजी बनी हुई है। इसमें सीतापुर, सहारनपुर आदि जिले के नाम प्रमुख हैं।
शिक्षा मंत्रालय ने केजीबीवी में कार्यरत सभी श्रेणी के कर्मचारियों यथा वार्डन, पार्टटाइम टीचर, उर्दू टीचर, लेखाकार, कुक, चपरासी व चौकीदारों के वेतन विसंगतियों को देखते हुए सभी राज्यों से उनके डाटा भी मंगवाए हैं।
अतुल बंसल, राष्ट्रीय अध्यक्ष कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय यूनियन
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