नई दिल्ली। साधनों की कमी बेटियों को शिक्षित बनाने की राह में रोड़ा बन रही हैं। घर के पास स्कूल, परिवहन और अन्य सुविधाओं की कमी से बेटियां बीच में ही पढ़ाई छोड़ देती हैं।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्ययन में यह खुलासा हुआ है। आयोग ने सरकार से हाई स्कूल और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों की कमी दूर करने एवं परिवहन साधन उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि बेटियां पढ़ सकें।
39.4% लड़कियां स्कूल से बाहर राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 15 से 18 वर्ष की 39.4 फीसदी लड़कियां स्कूल से बाहर हैं, जबकि 57 फीसदी लड़कियां 11वीं तक आते-आते पढ़ाई छोड़ देती हैं। देश में आज भी 15 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों में 2.7 फीसदी लड़कों की तुलना में 3.2 फीसदी लड़कियां स्कूल नहीं जाती हैं।
सुरक्षा बड़ी चिंता
एनएचआरसी की रिपोर्ट के अनुसार,
हाई स्कूल और सीनियर सेकेंडरी स्कूल दूर होने की वजह से परिवहन एक बड़ी चुनौती है। स्कूलों में परिवहन की व्यवस्था न होने से अभिभावकों के मन में बच्चों की सुरक्षा की चिंता बढ़ जाती है। इस कारण भी माता-पिता की बच्चियों को स्कूल भेजने में रुचि कम रहती है
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