सुप्रीम कोर्ट का हालिया आदेश शिक्षा व्यवस्था में गंभीर विसंगतियाँ पैदा कर रहा है।
1. कोर्ट ने B.Ed धारकों को प्राथमिक स्तर के लिए अपात्र घोषित कर दिया है। जब वे TET के ही पात्र नहीं, तो TET पास कर प्राथमिक शिक्षक कैसे बनेंगे?
2. जिनकी नियुक्ति 2000 से पहले इंटर के बाद BTC के आधार पर हुई, वे भी TET का फॉर्म नहीं भर सकते — ऐसे में भविष्य में उनकी वैधता पर प्रश्न खड़े होंगे।
3. B.P.Ed. धारकों को भी प्राथमिक शिक्षक पद के लिए अयोग्य ठहराया गया है — तो वे भी TET कैसे उत्तीर्ण करेंगे?
4. यह आदेश NCTE के मौलिक प्रावधानों से मेल नहीं खाता और अनुच्छेद 142 के विशेषाधिकारों के उपयोग में ग़लत मिसाल बन सकता है।
5. पूरे देश के लाखों शिक्षक प्रभावित होंगे, केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं।
कुल मिलाकर, आदेश स्वयं में ही परस्पर-विरोधी (contradictory) है।
पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दायर करने की तत्काल आवश्यकता है।
*यह केवल नीति का प्रश्न नहीं, बल्कि न्याय और शिक्षा व्यवस्था के भविष्य का प्रश्न है।*
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