नई दिल्ली: कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के सेवा में बने रहने और प्रोन्नति के लिए टीईटी परीक्षा पास करने की अनिवार्यता के फैसले के खिलाफ शिक्षक सुप्रीम कोर्ट में पुनः विचार याचिका दाखिल करने पर विचार कर रहे हैं। इस फैसले में कई मुद्दे हैं जिन्हें आधार बनाकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की जाएगी।
फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की तैयारी में शिक्षक संघ भी जुट गया है। शिक्षकों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कई तर्क दिए गए हैं जिन पर पुनर्विचार मांगना जरूरी है। कोर्ट का निर्णय सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों के लिए है, लेकिन सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त स्कूलों पर भी लागू होता है।
उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षक संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष राहुल पांडेय ने कहा कि इस फैसले के खिलाफ सभी शिक्षकों को एकजुट होकर अगला कदम उठाना होगा। पांडेय कहते हैं कि शिक्षक संघ के कई नेता भी पुनर्विचार याचिका दाखिल करने पर विचार कर रहे हैं।
तीन-चार मुद्दों को आधार बनाकर शिक्षक पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे। पहला मुद्दा यह है कि जिन शिक्षकों ने कई वर्षों पूर्व नौकरी ज्वाइन की थी, उन्हें अचानक टीईटी परीक्षा पास करने की अनिवार्यता नहीं थोपनी चाहिए। दूसरा मुद्दा यह है कि टीईटी सिर्फ सरकारी स्कूलों पर ही नहीं, बल्कि सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों पर भी लागू होता है। इसके अलावा, शिक्षकों की वरिष्ठता और अनुभव को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
अंत में, शिक्षकों का कहना है कि जो ऑर्डर आया है उसमें कई चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं। शिक्षकों को अपनी सेवा बनाए रखने और प्रमोशन के लिए अब टीईटी परीक्षा पास करना होगा।
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