आलापुर (अंबेडकरनगर)। केंद्र सरकार ने कुछ दिन पहले ही कर्मचारियों की पेंशन को लेकर नई स्कीम यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) की घोषणा की है। सरकार की इस नई पेंशन योजना का कर्मचारी संगठन विरोध कर रहे हैं। तहसील क्षेत्र के कर्मचारी संगठन के नेताओं का कहना है कि यह पेंशन स्कीम स्वीकार नहीं है। वह पुरानी पेंशन योजना की मांग कर रहे हैं। संगठनों का संघर्ष चल रहा है वह पुरानी पेंशन बहाली तक संघर्ष करते रहेंगे।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार इस स्कीम को एक अप्रैल 2025 से लागू कर देगी। इसमें बेसिक सैलरी की 50 फीसदी राशि पेंशन के तौर पर देने की बात कही गई है, जो कि एनपीएस में नहीं थी। इसे लेकर अलग-अलग कर्मचारियों ने अपनी राय रखी।
अटेवा के रामनगर ब्लॉक संयोजक रमेश यादव ने कहा कि कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली के लिए संघर्षरत हैं न कि एनपीएस में संशोधन के लिए। पहले सरकार एनपीएस को अच्छा बताती थी। अब थोपी गई यूपीएस को अच्छा बता रही है। यह रवैया ठीक नहीं है। पुरानी पेंशन ही कर्मियों के हित में है। उसे ही बहाल करना चाहिए, जिसके लिए कर्मी संघर्ष भी कर रहे हैं।
अटेवा के जहांगीरगंज शिवाकांत यादव ने कहा कि यूपीएस में सरकार शिक्षक व कर्मचारियों के 10 प्रतिशत अंशदान को ब्याज सहित सेवानिवृत्ति के बाद यदि लौटा देती है और साथ ही घोषित 50 प्रतिशत पेंशन देती है तो यह कर्मचारियों के बुढ़ापे के लिए एक बेहतर सहारा और सम्मान होगा। सरकार को इस तरह अनावश्यक अलग-अलग पेंशन स्कीम बनाकर शिक्षक कर्मचारियों को गुमराह नहीं करना चाहिए, बल्कि पुरानी पेंशन बहाल कर देनी चाहिए। अटेवा के ही रामनगर विकासखंड के सहसंयोजक ओमप्रकाश का कहना है कि यूपीएस, राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) से भी खराब है। यह केवल छलावा है। इस पेंशन योजना के दायरे में अर्ध सैनिक बल नहीं आएंगे। यूपीएस में एनआईएस की तरह 10 प्रतिशत वेतन से कटौती होगी। इस पैसे को सरकार सेवानिवृत होने पर वापस नहीं करेगी। कर्मचारी इन दोनों योजनाओं से संतुष्ट नहीं हैं। सभी को पुरानी पेंशन ही दी जाए।
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