प्रधानाचार्यों और शिक्षक संगठनों के साथ हुए मंथन के बाद इसे अंतिम रूप दिए जाने की संभावना
प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर के स्कूलों में अब शिक्षकों और कक्षाओं की उपलब्धता के आधार पर ही छात्रों के नामांकन की तैयारी चल रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन हाल ही में प्रधानाचार्यों और शिक्षक संगठनों के साथ हुए मंथन के बाद इसे जल्द ही अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।
प्रदेश में लगभग 30 हजार मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं।
इनमें से बड़ी संख्या ऐसे स्कूलों की है जहां न तो पर्याप्त भवन हैं और न ही पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हैं, फिर भी हर साल बड़ी संख्या में छात्रों का नामांकन लिया जा रहा है। पढ़ाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
नियम के अनुसार, एक कक्षा में अधिकतम 60 विद्यार्थियों के बैठने का प्रावधान है, लेकिन शिक्षकों की कमी के चलते कई स्कूलों में 100 से 110 छात्रों को एक ही कक्षा में बैठा दिया जाता है। इससे छात्रों को समुचित शिक्षा नहीं मिल पा रही है और उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।
लंबे समय से मान्यता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। यही वजह है कि छात्र संख्या वित्तविहीन विद्यालयों की ओर बढ़ रही है, जबकि मान्यता प्राप्त स्कूलों में नामांकन घटता जा रहा है। माध्यमिक शिक्षा परिषद के अपर
सचिव सत्येंद्र कुमार ने बताया कि शिक्षकों और कक्षाओं की उपलब्धता के अनुसार ही नामांकन और बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की योजना बनाई जा रही है।
इस पर अंतिम निर्णय प्रधानाचार्यों और शिक्षक संगठनों के साथ बैठक कर आपसी सहमति से लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रति कक्षा 60 छात्रों का मानक निर्धारित है और इसी के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। जल्द ही इस मुद्दे पर विस्तृत बैठक कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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