टीईटी पास न करने वाले शिक्षकों के लिए नौकरी खतरे में, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद शिक्षक समुदाय में टीईटी (Teacher Eligibility Test) को लेकर चिंता और उलझन का माहौल बन गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा एक से आठ तक के शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया है, वरना दो वर्ष के भीतर टीईटी पास न करने वाले शिक्षकों की सेवा समाप्त हो सकती है।  

### टीईटी पास करने में शिक्षक क्यों असमर्थ हैं?  

– साल 2000 के पहले बेसिक शिक्षक बनने के लिए इंटरमीडिएट की योग्यता थी, जबकि अब टीईटी के लिए स्नातक होना अनिवार्य है। दो साल में स्नातक बन पाना आमतौर पर संभव नहीं है।  

– टीईटी के लिए स्नातक में कम से कम 45% अंक जरूरी हैं, जबकि पुराने शिक्षकों में कई के अंक इससे कम हैं।  

– कुछ शिक्षक बी.एड. पास हैं पर कोर्ट के नए निर्णय के अनुसार वे बेसिक शिक्षक नहीं रह सकते।  

– कई शिक्षक जो बीटीसी (BTC) प्रशिक्षित हैं, वे भी टीईटी पास नहीं कर पाए हैं।  

– कुछ प्रशिक्षण मुक्त शिक्षक बिना BTC के टीईटी के लिए आवेदन नहीं कर सकते।  

– डी.पी.एड./बी.पी.एड. योग्यता वाले भी टीईटी आवेदन नहीं कर सकते।  

– कोर्ट को यह सारी शैक्षिक और नियुक्ति संबंधी जटिलताएं पूरी तरह से नहीं बताई गईं।  

### सुप्रीम कोर्ट के फैसले का प्रभाव  

– जिन शिक्षकों की सेवा में 5 साल से कम समय बचे है, उन्हें टीईटी पास करने की छूट दी गई है, लेकिन वे प्रमोशन के योग्य नहीं होंगे।  

– जिनकी सेवा में 5 साल से अधिक समय बचा है, उन्हें दो साल के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य होगा।  

– दो साल में टीईटी पास न होने पर शिक्षकों को सेवा समाप्ति का सामना करना पड़ सकता है, हालांकि वे टर्मिनल बेनिफिट्स के पात्र होंगे।  

– यह फैसला शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से लिया गया है, ताकि योग्य शिक्षकों को ही पदों पर रखा जा सके।  

### आगे का रास्ता  

– शिक्षकों में निराशा है, लेकिन लूट साफ है कि अभी पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं है और कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।  

– विभाग और शिक्षक समुदाय मिलकर कोर्ट में मामले को आगे लड़ेंगे।  

– नए नियमों के क्रियान्वयन में कुछ समय और मार्गदर्शन की आवश्यकता है ताकि सभी पक्षों की समस्याओं को ध्यान में रखा जा सके।  

इस फैसले का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है, परन्तु इसमें शैक्षिक योग्यता के पुराने नियमों और वर्तमान स्थिति के बीच कठिनाइयां स्पष्ट रूप से सामने आई हैं। शिक्षक भाई-बहनों को संयम और धैर्य के साथ इस प्रक्रिया का सामना करना होगा और कोर्ट के रास्ते पर भरोसा बनाए रखना होगा। 

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