बाराबंकी। जिला अस्पताल में दो साल से हृदय का डॉक्टर नहीं है। जांच करने वाली मशीन सालों से कमरे में बंद है। हार्ट अटैक पड़ने के बाद यहां पहुंचने वाला मरीज भगवान भरोसे हो जाता है। बुधवार को सीने में तेज दर्द होने के बाद इमरजेंसी लाया गया युवक तड़पता रहा। वह चिल्लाता रहा कि सांस रुक रही है। प्रशिक्षु डॉक्टर ने इलाज की कोशिश की मगर युवक ने पत्नी व बच्चे के सामने दम तोड़ दिया।
देवा क्षेत्र के चंदौली गांव निवासी रणविजय सिंह (40) प्राथमिक विद्यालय टाईखुर्द में शिक्षामित्र के पद पर तैनात थे। बुधवार सुबह उनके सीने में तेज दर्द उठा। परिजन उन्हें लेकर बड़ी उम्मीद से जिला अस्पताल पहुंचे। वहां एक स्ट्रेचर मिला जिसके पहिए चल ही नहीं रहे थे।
मजबूरी में परिजनों ने उन्हें अपने हाथों से उठाया और अंदर लेकर पहुंचे लेकिन अफसोस यह कि वहां हृदय का डॉक्टर ही नहीं था। वह चिल्ला रहे थे कि सीने में तेज दर्द हो रहा है। सांस रुक रही है। बचा लीजिए। ऐसे में प्रशिक्षु के रूप में काम करने वाले डॉक्टर ने उन्हें ऑक्सीजन देकर सीने पर धक्का मारना शुरू किया लेकिन कुछ देर बाद उनकी सांसें टूट गईं।
वहां मौजूद उनकी पत्नी व बच्चा बिलख पड़े। लोगों ने बताया कि दिल की जांच करने वाली टू डी ईको मशीन सालों से एक कमरे में बंद है और ओपीडी ठप है। सीएमएस भी मानते हैं कि ह्रदय रोग के डॉक्टर की जरूरत है। अभी एक सप्ताह पहले बस्ती जेल के एक बंदी की हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल लाया गया तो उसने भी दम तोड़ दिया था। कई अन्य मौत भी हो चुकी है।
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