केंद्र सरकार ने एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) को बढ़ावा देने के लिए इस योजना के कर लाभों में बदलाव किया है और अब यूपीएस धारकों को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के समान कर लाभ मिलेंगे। वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा, सरकार ने एनपीएस के तहत उपलब्ध कर लाभ जरूरी बदलावों के साथ यूपीएस पर भी लागू करने का फैसला किया है। यूपीएस को इस कर ढांचे के अंतर्गत शामिल करना कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयास की दिशा में एक और कदम है। अभी एनपीएस में योगदान करने वाले कर्मचारियों को धारा 80 सीसीई के तहत 1.50 लाख रुपये की कुल सीमा के भीतर धारा 80 सीसीडी (1) के तहत वेतन (मूल और
डीए) के 10 फीसदी तक कर छूट मिलती है। इसके अलावा धारा 80 सीसीडी (1बी) के तहत 50,000 रुपये तक और कर छूट मिलती है। धारा 80 सीसीडी (2) के तहत नियोक्ता के योगदान किए गए वेतन (मूल
और डीए) के 10 फीसदी तक कर छूट मिलती है। वहीं ऐसा योगदान यदि केंद्र सरकार ने किया हो, तो 80 सीसीई के तहत 1.50 लाख रुपये की कुल सीमा के बाद भी 14 फीसदी तक कर छूट मिलती है।
23 लाख कर्मचारी चुन सकते हैं यूपीएस का विकल्प : केंद्र के करीब 23 लाख कर्मचारी यूपीएस विकल्प का इस्तेमाल कर सकते हैं। एक जनवरी, 2004 के बाद सेवा में आए कर्मचारियों को न्यू पेंशन स्कीम के अलावा पूरे कॅरिअर में एक बार यूपीएस को चुनने का विकल्प दिया गया है। प्रानी पेंशन योजना (ओपीएस) में कर्मचारियों को अंतिम आहरित मूल वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलता था।
एनपीएस से आंशिक निकासी पर कर लाभ
स्वयं के अंशदान के 25 फीसदी तक की राशि पर कर छूट मिलती है। सेवानिवृत्ति के बाद एन्युटी की खरीद पर कर छूट मिलती है, जबकि एन्युटी से प्राप्त आय पर आयकर देय होता है। आयकर अधिनियम की धारा 10(12ए) के तहत 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति पर संचित पेंशन संपत्ति के 60 फीसदी की एकमुश्त निकासी कर मुक्त है।
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