इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुजारा भत्ता तय करने के प्रधान पारिवारिक न्यायालय मुजफ्फरनगर के 14 फरवरी 2025 के आदेश के खिलाफ दाखिल आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह ने नीता त्यागी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप का कोई ठोस कारण नहीं है। पति की कुल मासिक आय जो पांच हजार है का 25 प्रतिशत 1250 रुपये प्रतिमाह होता है। इस प्रकार दो हजार रुपये प्रतिमाह का गुजारा भत्ता उचित यथार्थवादी है।
याची के अधिवक्ता का तर्क था कि परिवार न्यायालय ने पहले तीन हजार रुपये प्रतिमाह अंतरिम गुजारा भत्ता निर्धारित किया था। वर्तमान में निर्धारित प्रतिमाह दो हजार रुपये गुजारा भत्ता अत्यंत कम है। कोर्ट ने रिकार्ड में पाया कि परिवार न्यायालय ने पति अमित कुमार त्यागी के 19 अक्टूबर 2017 को सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने और पिता की मेडिकल दुकान पर काम करने का तथ्य भी ध्यान में रखा है। इसके अनुसार उसे पांच हजार रुपये प्रतिमाह मिलता है। पत्नी के इस दावे के समर्थन में कोई दस्तावेजी साक्ष्य नहीं मिला कि पति के पास 40 बीघा कृषि भूमि है और इससे वह पर्याप्त आय अर्जित करता है।
कोर्ट ने कहा कि पति की आय और रजनेश बनाम नेहा व कुलभूषण कुमार (डॉ) के मामलों में सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए परिवार न्यायालय द्वारा निर्धारित गुजारा भत्ते की राशि पहले से ही उचित है।
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