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🔰 निजी फोन से जनगणना कराने का विरोध: शिक्षकों ने उठाए तकनीकी और आर्थिक बोझ के सवाल

लखनऊ। जनगणना कार्य में निजी मोबाइल फोन के उपयोग को लेकर शिक्षकों और शिक्षक संगठनों में विरोध तेज हो गया है। शिक्षकों का कहना है कि सरकार द्वारा जारी निर्देशों में आधुनिक फीचर वाले स्मार्टफोन के उपयोग की बाध्यता ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

जनगणना प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों और कर्मचारियों को बताया गया कि उन्हें जनगणना कार्य के लिए स्मार्टफोन का उपयोग करना होगा। इस पर बड़ी संख्या में शिक्षकों ने आपत्ति जताते हुए राज्य जनगणना अधिकारी से लेकर भारत के जनगणना रजिस्ट्रार तक विरोध पत्र भेजे हैं।

🔹 तकनीकी शर्तें बनीं बड़ी समस्या

शिक्षकों के अनुसार, जनगणना ऐप की तकनीकी शर्तें काफी सख्त हैं। जैसे कि एंड्रॉयड 12 या उससे ऊपर का वर्जन और कम से कम 4GB रैम जरूरी है। वहीं iPhone उपयोगकर्ताओं के लिए iOS 15.0 या उससे ऊपर का वर्जन अनिवार्य बताया गया है। ऐसे में जिन शिक्षकों के पास यह सुविधाएं नहीं हैं, उन्हें नया फोन खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

प्रशिक्षण के दौरान कई शिक्षक इस समस्या से जूझते नजर आए। उनका कहना है कि यह व्यवस्था उन पर अतिरिक्त आर्थिक और तकनीकी बोझ डाल रही है।

🔹 “BYOD मॉडल” पर भी उठे सवाल

इस पूरी व्यवस्था को “BYOD (Bring Your Own Device)” मॉडल के रूप में लागू किया गया है, यानी कर्मचारियों को अपने निजी फोन से सरकारी काम करना होगा। शिक्षकों का कहना है कि बिना किसी अतिरिक्त संसाधन या तकनीकी सहायता के यह व्यवस्था लागू करना उचित नहीं है।

🔹 शिक्षकों की प्रमुख आपत्तियां

  • सभी के पास आधुनिक स्मार्टफोन उपलब्ध नहीं
  • नया फोन खरीदना आर्थिक रूप से संभव नहीं
  • सरकारी कार्य के लिए निजी संसाधनों का उपयोग गलत
  • तकनीकी सहायता और संसाधनों की कमी

वरिष्ठ शिक्षक नेता ओम प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि डिजिटल जनगणना का दावा पूरी तरह कर्मचारियों के निजी संसाधनों पर आधारित है, जो व्यावहारिक नहीं है।

📢 निष्कर्ष

शिक्षकों का कहना है कि यदि सरकार डिजिटल जनगणना को सफल बनाना चाहती है, तो उसे कर्मचारियों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए। केवल निर्देश जारी कर निजी मोबाइल पर निर्भर रहना शिक्षकों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।

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