श्रावस्ती। हाल ही में माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के चलते देशभर के 10 लाख से अधिक सरकारी शिक्षकों की नौकरी पर संकट गहरा गया है। यदि यह आदेश निजी स्कूलों पर भी लागू होता है तो प्रभावित शिक्षकों की संख्या करोड़ों में पहुँच सकती है। इस फैसले से शिक्षक वर्ग में दुख और चिंता की लहर है।
प्रत्येक साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के मौके पर देश व प्रदेश की सरकारें शिक्षकों को सम्मानित करती हैं, लेकिन इस बार कई शिक्षक ऐसे होंगे जिन्हें TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) संबंधी नियमों के कारण दो साल बाद सेवा से निकाले जाने की चिंता है, जिससे वे बढ़ती असुरक्षा महसूस कर रहे हैं।
शिक्षक संघ की मांग है कि RTE (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट प्रदान की जाए। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के चलते देशभर के दस लाख से अधिक सरकारी शिक्षकों के लिए अपनी नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है।
संघ ने केंद्र व राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि शिक्षकों के साथ न्याय किया जाए और TET से संबंधित स्पष्ट और सम्मानजनक घोषणा की जाए। शिक्षक संघ का कहना है कि सरकार की तरफ से उचित घोषणा ही शिक्षकों के लिए वास्तविक सम्मान होगा।
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