बोनस का फर्जी ऑर्डर हुआ सोशल मीडिया पर वायरल
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह आदेश पूरी तरह से फर्जी (Fake) और एडिट किया गया (छेड़छाड़ युक्त) प्रतीत होता है।
इस पत्र की सत्यता की जांच करने पर निम्नलिखित गंभीर खामियां और विसंगतियां स्पष्ट रूप से सामने आती हैं:
साल और तारीखों की भारी विसंगति (Typo / Manipulation):
पत्र के मुख्य विषय में बोनस वर्ष 2025-26 लिखा गया है, लेकिन गणना और पात्रता से संबंधित नियमों में (बिंदु 2, 3, 4 और 5) वर्ष 2024 और 2025 की तारीखों का ही संदर्भ दिया गया है।
यह साफ दर्शाता है कि पिछले वर्षों (जैसे 2023 या 2024) के किसी पुराने शासनादेश को डिजिटल रूप से एडिट करके उसमें तारीखें बदली गई हैं।
शासनादेश संख्या में हेरफेर:
शीर्ष पर दर्ज पत्रांक संख्या में संख्या-7/2024/… दर्ज है, जबकि आदेश की तारीख पर 2026 अंकित किया गया है। यदि आदेश नया होता, तो पत्रांक का वर्ष भी वर्तमान का होना चाहिए।
शासनादेश पोर्टल पर सत्यापन (Fact-Check):
उत्तर प्रदेश सरकार के सभी आधिकारिक और मान्य शासनादेश वित्त विभाग की आधिकारिक वेबसाइट shasanadesh.up.gov.in पर डिजिटल रूप से उपलब्ध और सत्यापित होते हैं।
इस पत्र पर कोई डिजिटल सत्यापन कोड (Digital Verification Code) या क्यूआर कोड नहीं है, जिससे स्पष्ट होता है कि यह शासन के अधिकृत पोर्टल से जारी नहीं हुआ है।
हस्ताक्षर और प्रारूप:
पत्र के अंत में दर्ज नाम और पदनाम के फॉन्ट व अलाइनमेंट में स्पष्ट छेड़छाड़ (एडिटिंग) नजर आ रही है।
निष्कर्ष: यह पत्र आधिकारिक नहीं है, बल्कि पुराने शासनादेश में एडिट कर तैयार किया गया एक फर्जी (Fake) दस्तावेज़ है। किसी भी सरकारी आदेश पर भरोसा करने से पहले हमेशा उत्तर प्रदेश सरकार की आधिकारिक वेबसाइट shasanadesh.up.gov.in पर जाकर शासनादेश संख्या से उसका सत्यापन अवश्य करें।
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