प्रयागराज। शासन की ओर से तय तारीख पांच फरवरी बीतने के बावजूद जिले में 5.43 लाख बच्चों की अपार आईडी नहीं बन सकी हैं। बुधवार को अंतिम दिन सभी विद्यालयों में 28,463 हजार आईडी बनाई गई, बावजूद इसके अपने लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाई।
ऐसे में अब बच्चों के अभिभावकों को डर सता रहा है कि यदि नई तारीख नहीं आती है तो आईडी कैसे बनेगी। वहीं, अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही नई तारीख की घोषणा की जाएगी।
शासन से कक्षा एक से 12 तक वित्तविहीन शिक्षण संस्थानों, राजकीय शिक्षण संस्थान और निजी शिक्षण संस्थान में पढ़ने वाले छात्रों की अपार आईडी अनिवार्य की गई है। इसमें 12 अंक का एक नंबर दिया जा रहा है।
इस नंबर से छात्र की पूरी जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो जाएगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों के शैक्षिक दस्तावेज में पारदर्शिता लाना और दस्तावेज के सुरक्षित
डिजिटलीकरण को सुनिश्चित करना है, लेकिन जिले में इस महत्वपूर्ण आईडी को तैयार कराने में विद्यालय ने गंभीरता नहीं दिखाई है।
जिले में 10,47,337 विद्यार्थियों की
अपार आईडी बनाई जानी है। इसमें से अब तक 4,95,014 छात्र की अपार आईडी जनरेट हो सकी है, जबकि 5,43,719 आईडी बननी बाकी है।
अभिभावकों को आ रहीं दिक्कतें
• छात्रों के आधार कार्ड में पते का गलत लिखा होना
• आधार कार्ड का अपडेट नहीं होना
• स्कूल रिकॉर्ड व आधार में नाम, जन्मतिथि अलग-अलग होना
• जन्म प्रमाणपत्र और आधार कार्ड नहीं बनना
यू-डायस पोर्टल पर अपलोड नहीं था डाटा
जिले के कई विद्यालयों ने विद्यार्थियों का डाटा ही यू-डायस पोर्टल पर अपलोड नहीं किया था। आधार कार्ड में गलत जानकारी दर्ज होने से अपार आईडी नहीं बन सकी। पोर्टल पर बच्चों के नाम, जन्मतिथि समेत अन्य जानकारी का मिलान करने पर गलतियां सामने आईं। जिससे बच्चों की अपार आईडी जनरेट नहीं हो सकी।
अपार आईडी बनाने में सबसे अधिक दिक्कत गलत डाटा की वजह से हो रही है। बच्चों के नाम, जन्मतिथि व आधार में दर्ज जानकारी सही नहीं है। बुधवार तक जिले में पंजीकृत 10.47 लाख के सापेक्ष 4.95 लाख बच्चों की अपार आईडी बन चुकी है।
– प्रवीण तिवारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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