हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से संबंधित फैसले को लेकर शिक्षकों में उत्पन्न विवाद पर स्पष्टता आने लगी है। सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के विशेष अधिकार का प्रयोग करते हुए शिक्षक वर्ग के लिए एक संतुलित निर्णय दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने उन शिक्षकों को, जिनकी सेवा अवधि 5 वर्ष से अधिक बची है, TET से छूट प्रदान करते हुए दो साल का समय प्रदान किया है। इसके बिना 1 सितंबर से नॉन टीईटी शिक्षकों की सेवा समाप्त हो जाती। यह निर्णय न्यायपालिका की संवेदनशीलता और समुचित न्याय का प्रमाण है।
साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम में संशोधन भारत सरकार द्वारा किया गया है, न कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा। इसलिए इस मुद्दे पर अब आगे की कार्यवाही और नीतिगत निर्णय भारत सरकार की नजर में हैं।
शिक्षकों और जनता से अपील है कि वे सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का सम्मान करें और इस मामले में अनावश्यक टिप्पणी व विवाद से बचें। सभी आशायें अब भारत सरकार की दया दृष्टि और समझदारी पर टिकी हैं।
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