शहर में स्थित सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या भले ही सीमित हो, लेकिन शिक्षकों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। इसके उलट ग्रामीण क्षेत्र के एडेड कॉलेजों में छात्र संख्या हजारों में होने के बावजूद शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। स्थिति यह है कि कई स्कूल प्रबंधन को अपने खर्च पर प्राइवेट शिक्षकों को रखकर पढ़ाई करानी पड़ रही है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के मानक के अनुसार कक्षा 6 से 8 तक 60, कक्षा 9 व 10 में 65 जबकि कक्षा 11 व 12 में 80 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना चाहिए।
आरटीआई मानक के अनुसार कक्षा 6 से 8 तक 35 छात्रों पर एक शिक्षक की अनिवार्यता है। इन स्कूलों में आरटीआई मानक के अनुसार 35 छात्रों पर एक शिक्षक को मान लिया जाए तो अधिकतम 12 शिक्षक पर्याप्त हैं।
हालांकि हर साल स्थानांतरण के नाम पर होने वाले “खेल” का परिणाम यह है कि बच्चों की संख्या भले ही नहीं बढ़ रही हो, लेकिन शिक्षकों का तबादला धड़ल्ले से हो रहा है। प्रयागराज के एडेड कॉलेजों में किए गए तबादलों में से अधिकांश शिक्षक शहर के स्कूलों में भेज दिए गए हैं। कई शिक्षक ऐसे भी हैं जो प्रयागराज के ही ग्रामीण स्कूलों से ट्रांसफर होकर शहर के स्कूलों में आ गए हैं। तबादला करने में न तो प्रबंधन और न ही अफसरों ने छात्र संख्या देखने की जहमत उठाई है।
जिले के स्कूलों में 116 शिक्षकों का हुआ ऑफलाइन तबादला
केस – 1
डॉ. केपी जायसवाल इंटर कॉलेज में कक्षा 6 से 12 तक कुल विद्यार्थियों की संख्या 410 है। यहां पहले से 31 शिक्षक कार्यरत थे। इस साल प्रधानाचार्य डॉ. शिव ओम समेत पांच और शिक्षक — कल्पना केसी, उमाकांत तिवारी, अजय कुमार और वीरेंद्र कुमार यादव ट्रांसफर होकर आ गए। अब प्रधानाचार्य समेत शिक्षकों की कुल संख्या 36 हो गई है।
केस – 2
इलाहाबाद इंटर कॉलेज में कक्षा 6 से 12 तक कुल 427 बच्चे अध्ययनरत हैं। यहां पहले से 31 शिक्षक कार्यरत थे। इस साल चार शिक्षिकाओं — पूनम सिंह, सरिता यादव, निधि त्रिपाठी और प्रियंका का यहां तबादला हो गया है।
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