रामपुर, फर्जी दस्तावेजों के सहारे वर्ष 1992 में बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापिका की नौकरी हासिल करने वाली पाकिस्तानी नागरिक माहिरा उर्फ फरजाना के खिलाफ पुलिस ने अंततः मंगलवार को मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरोपी महिला ने न केवल अपनी पाकिस्तानी नागरिकता का तथ्य छिपाया, बल्कि लंबे समय तक विभाग को गुमराह कर सरकारी खजाने से वेतन भी लिया। पुलिस अब इस पूरे फर्जीवाड़े की कड़ियों को खंगालने में जुटी है। कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला आतिशबाज निवासी अख्तर अली की बेटी फरजाना ने 17 जून 1979 को पाकिस्तान निवासी सिबगत अली से निकाह किया था, जिसके बाद वह पाकिस्तान चली गई और वहां की नागरिकता प्राप्त कर ली।
पाकिस्तान में उसने दो बेटियों फुरकाना और आलिमा को जन्म दिया। निकाह के करीब तीन साल बाद पति द्वारा तलाक दिए जाने पर वह दोनों बेटियों के साथ रामपुर अपने मायके लौट आई। वीजा अवधि समाप्त होने के बावजूद भारत में रह रही फरजाना के खिलाफ एलआईयू ने वर्ष 1983 में शहर कोतवाली में विदेशी अधिनियम की धारा 14 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में 25 जून 1985 को सीजेएम कोर्ट ने उसे मुकदमे की समाप्ति तक अदालत में उपस्थित रहने का आदेश दिया था। इसके बावजूद उसने अपनी पाकिस्तानी नागरिकता का तथ्य छिपाकर 22 जनवरी 1992 को बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक की नौकरी हासिल कर ली और प्राथमिक विद्यालय कुम्हरिया कला में तैनात हो गई। मामला पकड़ में आने के बाद बर्खास्त कर दिया गया था। अब बीते दिनों इस प्रकरण में शिक्षिका पर रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश प्राप्त हुए थे। जिसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी सुनील कुमार और सहायक कनिष्ठ अजीमनगर थाने पहुंचे और तहरीर दी। अब पुलिस ने मोहित सिंह की तहरीर के आधार पर माहिरा उर्फ फरजाना के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। -शिक्षा विभाग की ओर से इस मामले में शिकायत पत्र मिला था। उस शिकायत पत्र के आधार पर अजीनगर थाने में केस दर्ज किया गया है। मामले की जांच होगी। -विद्या सागर मिश्र, एसपी
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