सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि देश में लोग न सिर्फ कुत्तों के काटने से मर रहे हैं, बल्कि सड़कों पर आवारा पशुओं के चलते होने वाले हादसों में भी जान गंवा रहे हैं। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए देशभर में सड़कों से आवारा कुत्तों और पशुओं को हटाने का आदेश दिया।
जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन वी अंजानिया की विशेष पीठ ने कहा कि यह सिर्फ कुत्तों के काटने की बात नहीं है, बल्कि सड़कों पर आवारा पशुओं का घूमना भी खतरनाक साबित हो रहा है और वे दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। सड़कें कुत्तों और आवारा पशुओं से साफ होनी ही चाहिए। आवारा कुत्तों की समस्या से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने यह आदेश दिया।
नियमों को सख्ती से लागू किया जाए : शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि देशभर में नगर निगमों/ निकायों को इस संबंध में बनाए गए नियमों को सख्ती से लागू करना होगा। जस्टिस मेहता ने कहा कि ‘पिछले 20 दिनों में आवारा पशुओं के चलते राजस्थान हाईकोर्ट के दो न्यायाधीश सड़क हादसों का शिकार बन चुके हैं। यह एक बेहद ही गंभीर मुद्दा है।’
अदालतों-अस्पतालों में कुत्तों की मौजूदगी क्यों हो : शीर्ष अदालत ने सवाल उठाया कि क्या अदालतों, स्कूलों, कॉलेजों और अस्पतालों जैसी जगहों पर कुत्तों की मौजूदगी होनी चाहिए? जस्टिस मेहता ने कहा कि ये संस्थान हैं, कोई सड़क नहीं। ऐसी जगहों पर कुत्तों की क्या ज़रूरत है? उन्होंने कहा कि ऐसी जगहों पर बच्चों, मरीजों, व आम लोगों को बिना किसी रुकावट आने-जाने की सुविधा मिलनी चाहिए।
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