देवरिया। वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता लागू किए जाने के विरोध में शिक्षकों का आंदोलन तेज होने जा रहा है। शुक्रवार को सदर बीआरसी स्थित शिक्षक भवन में विभिन्न शिक्षक संगठनों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई, जिसमें आंदोलन की रणनीति तैयार की गई और शिक्षकों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी भी की।
बैठक में उपस्थित शिक्षकों ने कहा कि यह संघर्ष केवल किसी एक जिले का नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा है। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के प्रदेश संयोजक अनिल यादव ने कहा कि टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ी जाएगी और किसी भी शिक्षक का अहित नहीं होने दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकीलों का पैनल भी तैयार किया जाएगा। साथ ही राज्य सरकार से केंद्र सरकार के साथ वार्ता कर इस समस्या का समाधान निकालने की मांग की गई।
आंदोलन के चरण तय
बैठक में आंदोलन के विभिन्न चरण तय किए गए।
आंदोलन के पहले चरण में 9 से 15 मार्च तक पोस्टकार्ड अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष को पत्र व ई-मेल भेजकर शिक्षकों की समस्या से अवगत कराया जाएगा।
दूसरे चरण में जिलों में मशाल जुलूस निकाला जाएगा और तीसरे चरण में तीन मई को लखनऊ में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद भी यदि मांगें पूरी नहीं होती हैं तो मानसून सत्र के दौरान संसद भवन का घेराव करने की चेतावनी दी गई है।
शिक्षकों के अस्तित्व की लड़ाई
उत्तर प्रदेश पूर्व माध्यमिक जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष विनोद सिंह और महामंत्री नंदलाल प्रसाद ने कहा कि यह लड़ाई शिक्षकों के अस्तित्व की लड़ाई है और इसे हर मोर्चे पर मजबूती से लड़ा जाएगा।
बैठक में कई शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें सो. शिक्षक संगठन के पदाधिकारी, सेवानिवृत्त शिक्षक परिषद के प्रतिनिधि, जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के पदाधिकारी तथा अन्य संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।
बैठक का संचालन मनोज मिश्रा ने किया।
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