प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि कोई विशिष्ट सेवा नियमावली या वैधानिक प्रावधान नहीं होने पर स्व वित्तपोषित संस्थानों के कर्मचारी सेवानिवृत्ति लाभ पाने के अधिकारी नहीं हैं। इसी के साथ कोर्ट ने कुछ लोगों को परिलाभ का भुगतान होने के आधार पर इविवि के पत्राचार संस्थान की निदेशक की इसी मांग को अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्ति परिलाभ देने का नियम नहीं है तो नकारात्मक समानता की मांग नहीं की जा सकती।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने रेखा सिंह की याचिका खारिज करते हुए दिया है। याचिका में सेवानिवृत्ति लाभ (पेंशन तथा ग्रेच्युटी) की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि पेंशन और ग्रेच्युटी के दावा के लिए विशिष्ट नियमों या वैधानिक प्रवधानों का होना आवश्यक है। ऐसा कोई प्रावधान नहीं होने पर कर्मचारी सेवानिवृत्ति लाभ का दावा नहीं कर सकता, भले ही संस्थान इलाहाबाद विश्वविद्यालय का अभिन्न अंग हो। याची इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरेस्पॉन्डेंस कोर्सेज एंड कंटिन्यूइंग एजुकेशन में असिस्टेंट डायरेक्टर/डायरेक्टर पद से सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने 2016 में याचिका दाखिल कर नवंबर 2014 से बकाया वेतन भुगतान के लिए विश्वविद्यालय को निर्देश देने की मांग की थी। उनकी याचिका स्वीकार करते हुए कोर्ट ने 13 अप्रैल 2018 को कहा कि नवंबर 2014 से 2017 में सेवानिवृत्ति तक वेतन का भुगतान किया जाए। इस आदेश को इविवि ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
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