शिक्षकों के तबादले और पदोन्नति का मुद्दा: आखिर कब मिलेगी घर के पास सेवा का अवसर? – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

primarymaster.in


 

उत्तर प्रदेश के परिषदीय शिक्षकों के बीच एक बार फिर तबादले (ट्रांसफर) और पदोन्नति (प्रमोशन) का मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। शिक्षकों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि वर्षों से उनकी प्रमुख समस्याओं पर अपेक्षित गंभीरता से काम नहीं किया गया, जिसके कारण हजारों शिक्षक आज भी अपने गृह जनपद से दूर सेवा देने को मजबूर हैं।

शिक्षकों का कहना है कि प्रदेश के अन्य विभागों में नियमित रूप से स्थानांतरण की प्रक्रिया चलती रहती है, लेकिन शिक्षकों के मामले में यह व्यवस्था उतनी प्रभावी दिखाई नहीं देती। उनका सवाल है कि जब अन्य कर्मचारियों को स्थानांतरण का अवसर मिलता है, तो शिक्षकों को इससे वंचित क्यों रखा जाता है?

कई शिक्षक यह भी पूछ रहे हैं कि वर्षों से ट्रांसफर और प्रमोशन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ठोस प्रयास कितने हुए हैं। उनका मानना है कि केवल ज्ञापन सौंप देना ही संघर्ष नहीं माना जा सकता। यदि किसी मांग को लेकर धरना, आंदोलन या व्यापक स्तर पर दबाव नहीं बनाया जाता, तो उसका अपेक्षित परिणाम मिलना कठिन हो जाता है।

शिक्षक समुदाय का तर्क है कि पिछले लगभग एक दशक में 15,000, 68,000 और 69,000 शिक्षक भर्ती जैसी बड़ी नियुक्तियां हुईं। इन तीनों भर्तियों को मिलाकर लगभग 1.5 लाख नए शिक्षकों की नियुक्ति हुई। यदि प्रत्येक भर्ती से पहले या उसके दौरान व्यापक स्तर पर अंतरजनपदीय स्थानांतरण किए गए होते, तो हजारों शिक्षकों को अपने गृह जनपद के निकट सेवा का अवसर मिल सकता था।

शिक्षकों के अनुसार स्थानांतरण की मांग करने वालों की संख्या कुल भर्ती के मुकाबले काफी कम थी। ऐसे में योजनाबद्ध तरीके से ट्रांसफर प्रक्रिया लागू की जाती तो न केवल शिक्षकों की समस्या का समाधान होता, बल्कि जिलों में शिक्षकों की उपलब्धता का संतुलन भी बना रहता।

कई शिक्षक यह भी मानते हैं कि सेवा के महत्वपूर्ण वर्ष अपने परिवार से दूर बिताने के बाद यदि स्थानांतरण की व्यवस्था प्रभावी नहीं बनती है, तो अनेक शिक्षक सेवानिवृत्ति तक अपने घर वापस नहीं पहुंच पाएंगे। यही कारण है कि अब शिक्षक समुदाय के भीतर ट्रांसफर और प्रमोशन के मुद्दे पर अधिक सक्रिय और परिणामोन्मुख नेतृत्व की मांग उठने लगी है।

शिक्षकों का कहना है कि आने वाले समय में सरकार और संबंधित संगठनों को इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, ताकि लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे शिक्षकों को राहत मिल सके और शिक्षा व्यवस्था भी अधिक संतुलित एवं प्रभावी बन सके।

Basic Shiksha Khabar | PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News | Primarykamaster | Updatemarts | Primary Ka Master | Basic Shiksha News | Uptet News | primarykamaster | SHIKSHAMITRA

Leave a Comment