पोस्ट लम्बी है इसलिए ध्यान से पढ़ें।
अभी कुछ दिन पहले गुजरात और राजस्थान से न्यूज़ आई थी कि प्रमोशन परीक्षा में अच्छी खासी संख्या में जज फेल हों गए। इसका अर्थ ये हुआ कि वो काबिल नहीँ थे?
मैं नहीँ मानता… जज काबिल हैँ तभी इस पद पर है। हाँ फेल हुए कोई भी जज नौकरी से नहीँ हटाये गए।
अब बात करते हैँ शिक्षकों की। कुछ लोंगो का बोलना है कि शिक्षक है तो परीक्षा से कैसा डरना? बिलकुल… हम शिक्षक किसी परीक्षा से नहीँ डरते।
एक शिक्षक द्वारा जूनियर टेट के पुराने पेपर मांगे गए तो मैंने भी एक नज़र पेपर पऱ दौड़ा ली। मैंने गणित के कुछ क्वेश्चन देखे जो अवकलन और समाकलन यानि कैलकुलस द्वारा हल होते।
मुझे पढ़ाते हुए 10 साल से ज्यादा हों गया। आप बेसिक विभाग की गणित का कोई भी प्रश्न दें, मैं उसको हल कर सकता हूँ पर क्या मैं अब कैलकुलस कों सॉल्व कर सकता हूँ? बिलकुल नहीँ क्योंकि मैं जो 10 साल से रोज़ पढ़ा रहा हूँ बस उसको ही जानता हूँ और अच्छे तरीके से जानता हूँ पर जो विषय छोड़े हुए कई साल हों गए और जिसका उपयोग कभी होना नहीँ तो उसको क्यों पढ़ता?
ऐसे तो मुझे रोज़ ट्रिग्नोमेट्री, कैलकुलस, अलजेबरा पढना चाहिए क्योंकि क्या पता कब सरकार मुझसे इससे सम्बंधित प्रश्न ही पूँछ ले वरना बोले निकलो बाहर।
टेट एक पात्रता परीक्षा है। इसकों पास करके समाज जान सकता है कि विद्यालय में पढ़ाने वाला शिक्षक मेरे बच्चें कों सही पढ़ा रहा है। पर इस पात्रता परीक्षा की भी शर्ते हैँ।
आप मुझसे वो प्रश्न पूंछे जो मैं रोज़ पढ़ाता हूँ अगर उनके जवाब न दें पाऊं तो बेशक़ जॉब में रहने का अधिकारी नहीँ। पर इस तरह की परीक्षा तो पुराने या वो शिक्षक जो विद्यालय में ही दिन रात एक किये हैँ, कभी पास ही न कर पाएंगे।
अब आपके सामने दो प्रश्न छोड़कर जा रहा
1. बिना टेट वाले शिक्षक के पढ़ाये बच्चे अगर आज सरकारी जॉब में हैँ तो क्या इसमें शिक्षक की मेहनत नहीँ थी, क्या वो काबिल नहीँ था?
2. जिन अध्यापको की रिट से ये फैसला आया उनको दुबारा टेट पास करने कों बोला जाए, देखना कितने फिर से पास कर पाएंगे।
धन्यवाद 🙏🏻
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