बांदा। जिले के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक व विद्यार्थियों के अनुपात को बराबर करने की कवायद शुरू कर दी गई, पर नगर क्षेत्र के स्कूलों की हालत बेहद खराब है। यहां एक-एक शिक्षक तीन-तीन विद्यालय संचालित करा रहे हैं तो कई विद्यालय शिक्षामित्र के भरोसे चल रहे हैं।
शहर के गूलरनाका में जल संस्थान के बगल दो परिषदीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें एक-एक शिक्षिका संबद्ध की गई हैं। जबकि दोनों स्कूलों में सौ से ज्यादा छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। इंचार्ज प्रधानाध्यापिका रंजना ने बताया कि शिक्षकों की कमी के चलते उनके पास तीन विद्यालय का चार्ज है। वह किसी तरह से तीनों विद्यालयों में माध्याह्न भोजन से लेकर पठन-पाठन करा रही हैं। इसी तरह पुलिस लाइन में तैनात प्रधानाध्यापक संतोष कुमार की स्वराज काॅलोनी विद्यालय में भी जिम्मेदारी है। यहां एक शिक्षामित्र है, जो बच्चों को संभाल रही हैं। नगर क्षेत्र में संचालित 28 विद्यालयों में वर्षों से शिक्षकों की कमी पूरी नहीं की गई है। जबकि प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्तर पर 30 से 35 बच्चों पर एक शिक्षक की तैनाती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत बच्चों की भाषा व गणित विषय में निपुण बनाने की कवायद चल रही है। विभागीय जानकारों ने बताया कि वर्ष 2010-11 में समायोजन नीति बनाई गई थी, मगर जिम्मेदारों की उदासीनता से यह नीति भी ठंडे बस्ते में चली गई।
नगर व ग्रामीण अलग-अलग कैडर
नगर शिक्षा अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि नगर व ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों का कैडर अलग-अलग है। कैडर के हिसाब से ही नियुक्ति व समायोजन होता है। नगर क्षेत्र में कई वर्षों से समायोजन व नियुक्ति नहीं हो सकी है। लंबे समय से नियुक्ति व समायोजन की मांग की जा रही है, पर समाधान नहीं हो सका।
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