लखनऊ। उत्तर प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली, शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की व्यापक जांच शुरू होने जा रही है। उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद ने इसके लिए 11 समितियों का गठन किया है, जो प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों का निरीक्षण कर विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करेंगी।
समितियां विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक कैलेंडर के पालन से लेकर परीक्षा प्रणाली, डिग्री वितरण, छात्र सुविधाओं और वित्तीय प्रबंधन तक की जांच करेंगी। निरीक्षण का उद्देश्य उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और नियमों का पालन कराना है।
शैक्षणिक कैलेंडर और परीक्षाओं की होगी समीक्षा
जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि विश्वविद्यालय राज्य सरकार के साझा (कॉमन) शैक्षणिक कैलेंडर का पालन कर रहे हैं या नहीं। सेमेस्टर, परीक्षाओं, परिणामों और अवकाश की तिथियों का मिलान भी किया जाएगा। इसके साथ ही प्रवेश प्रक्रिया और प्रवेश नियमों की पारदर्शिता की भी जांच होगी।
डिग्री और प्रमाणपत्र भी जांच के दायरे में
समितियां विश्वविद्यालयों द्वारा जारी की गई डिग्रियों और प्रमाणपत्रों की गुणवत्ता, वैधता और प्रक्रियाओं की समीक्षा करेंगी। यह भी देखा जाएगा कि विश्वविद्यालय समय पर आवश्यक सूचनाएं और रिपोर्ट संबंधित विभागों को भेज रहे हैं या नहीं।
छात्र सुविधाओं का होगा भौतिक सत्यापन
निरीक्षण टीम विश्वविद्यालय परिसरों में उपलब्ध सुविधाओं का भी भौतिक सत्यापन करेगी। इसमें शामिल हैं:
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खेल मैदान और खेल सुविधाएं
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ऑडिटोरियम और सेमिनार हॉल
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छात्रावास (हॉस्टल) व्यवस्था
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पुस्तकालय और प्रयोगशालाएं
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सुरक्षा और अन्य आधारभूत सुविधाएं
छात्रों से भी ली जाएगी राय
जांच के दौरान छात्रों और उनके प्रतिनिधियों से बातचीत कर यह भी जाना जाएगा कि उन्हें विश्वविद्यालय में पर्याप्त सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं। साथ ही उनकी शैक्षणिक गतिविधियों में भागीदारी और संतुष्टि के स्तर का भी आकलन किया जाएगा।
नकल रोकने की व्यवस्था की होगी जांच
समितियां परीक्षा व्यवस्था की मजबूती और नकल रोकने के लिए किए गए इंतजामों की भी समीक्षा करेंगी। सीसीटीवी निगरानी, परीक्षा नियंत्रण प्रणाली, तकनीकी संसाधनों और अन्य सुरक्षा उपायों की जांच की जाएगी।
बीएड प्रशिक्षुओं की इंटर्नशिप अब माध्यमिक विद्यालयों में
इसी बीच माध्यमिक शिक्षा विभाग ने निर्देश जारी किए हैं कि सरकारी और निजी बीएड कॉलेजों के छात्र-छात्राओं की इंटर्नशिप अब अनिवार्य रूप से राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कराई जाएगी। जहां राजकीय विद्यालय उपलब्ध नहीं होंगे, वहां सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी।
मुख्य बिंदु
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निजी विश्वविद्यालयों की जांच के लिए 11 समितियों का गठन।
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शैक्षणिक कैलेंडर, परीक्षा व्यवस्था और डिग्री वितरण की होगी समीक्षा।
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खेल मैदान, छात्रावास और अन्य सुविधाओं का भौतिक सत्यापन।
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छात्रों और प्रतिनिधियों से भी लिया जाएगा फीडबैक।
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नकल रोकने की व्यवस्थाओं की होगी जांच।
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बीएड प्रशिक्षुओं की इंटर्नशिप अब माध्यमिक विद्यालयों में अनिवार्य।
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