वित्त मंत्रालय से बात कर रहा पीएफआरडीए, कोष प्रबंधक बनाएंगे नई व्यवस्था
तैयारी : एनपीएस सदस्यों को मिल सकती है सुनिश्चित पेंशन
नई दिल्ली
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के अंशधारकों के लिए राहत भरी खबर है। एनपीएस में अब बाजार के उतार-चढ़ाव से अलग एक सुनिश्चित रिटर्न या तय पेंशन भुगतान का विकल्प मिल सकता है। पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए वित्त मंत्रालय के साथ सक्रिय बातचीत कर रहा है। हालांकि, यह योजना अभी शुरुआती स्तर पर है।
मूल रूप से एनपीएस एक योगदान आधारित व्यवस्था है, जहां अंतिम लाभ बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है और पहले से किसी निश्चित पेंशन की गारंटी नहीं होती। इसे देखते हुए नियामक ‘न्यूनतम सुनिश्चित रिटर्न योजना’ का प्रारूप तैयार कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे निवेशकों को एक सुरक्षित विकल्प देना है, जो बाजार जोखिम के बजाय सेवानिवृत्ति के बाद बंधी-बंधाई आय चाहते हैं।
एक साल में हुए 5 बड़े नीतिगत बदलाव
निकासी सीमा में वृद्धि: दिसंबर 2025 में 12 लाख रुपये से अधिक बचत वाले अंशधारकों के लिए निकासी के समय एकमुश्त रकम की सीमा 60% से बढ़ाकर 80% कर दी गई।
जिंसों में निवेश की छूट: पेंशन कोषों को एनपीएस की राशि का कुछ हिस्सा कमोडिटी (जिंसों) में लगाने की अनुमति प्रदान की गई।
बैंकों को नया ढांचा: जनवरी 2026 में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को स्वतंत्र रूप से एनपीएस संपत्तियों का प्रबंधन करने वाले पेंशन फंड प्रायोजित करने की मंजूरी मिली।
एनपीएस वात्सल्य में ढील: नाबालिग बच्चों के लिए शुरू की गई ‘एनपीएस वात्सल्य’ योजना के एग्जिट नियमों को अधिक लचीला और सुगम बनाया गया।
ऑडिट नियमों में सख्ती: जून 2026 में ग्राहक सेवा केंद्रों (पीओपी) की जवाबदेही तय करने के लिए ऑडिट नियमों को और अधिक कड़ा किया गया।
पहले भी तैयार हुआ था खाका
एनपीएस में गारंटीशुदा भुगतान का प्रस्ताव नया नहीं है। पीएफआरडीए ने सितंबर 2025 में इस पर एक परामर्श पत्र जारी किया था। इसके बाद जनवरी 2026 में नियमित पेंशन ढांचे पर सलाह देने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई थी। इस समिति को निकासी सीमा, लॉक-इन अवधि, शुल्क संरचना, जोखिम प्रबंधन और कर नियमों पर स्पष्ट दिशानिर्देश तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया है।
लागत और सुरक्षा का संतुलन
गारंटीशुदा रिटर्न देने के लिए पेंशन कोष प्रबंधकों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाव की व्यवस्था करनी होगी, जिससे परिचालन लागत बढ़ सकती है। पीएफआरडीए का प्रयास है कि गारंटी के बावजूद एनपीएस का सबसे मजबूत पहलू—यानी इसकी कम लागत—प्रभावित न हो। इसके लिए पेंशन फंडों को वायदा अनुबंध बाजार (डेरिवेटिव मार्केट) में शर्तों के साथ अधिक पहुंच देने पर विचार किया जा रहा है।
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