पदोन्नत डाकिया को मिलेगा पुरानी पेंशन का लाभ
अतिरिक्त शाखा डाक पाल से मिली थी पदोन्नति, कैट इलाहाबाद बेंच का बड़ा फैसला
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की इलाहाबाद बेंच ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में आवेदक सत्यपाल सिंह (ग्राम वाबरसी सरधना मेरठ) को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) का लाभ देने का आदेश दिया है।
मेरठ में सरधना क्षेत्र के गांव वाबरसी निवासी सत्यपाल सिंह को 26 जुलाई 1979 को अतिरिक्त विभागीय शाखा डाकपाल वाबरसी (सरधना) पद पर संविदा आधार पर नियुक्त किया गया था और चार सितंबर 1979 को उन्हें कार्यभार सौंपा गया। बाद में सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा (एलडीसीई) के जरिये ग्रामीण डाक सेवक (जीडीएस) कोटे से उन्हें नियमित पद पत्रवाहक (पोस्टमैन) पर पदोन्नत किया गया। लगातार सेवा देने के बाद वह 31 जनवरी 2018 को सेवानिवृत्त हुए। विभाग ने उन्हें एनपीएस में रख कर 1,735 रुपये मासिक पेंशन दी। वरिष्ठ पोस्टमास्टर मेरठ कैंट ने 25 जुलाई 2022 को ओपीएस का उनका दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि नियमित नियुक्ति पहली जनवरी 2004 के बाद हुई है।
अधिकरण के फैसले का होगा दूरगामी प्रभाव केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण यह निर्णय उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें बाद में नियमित पदों पर पदोन्नत किया गया, लेकिन जिनकी पुरानी सेवा को पेंशन के लिए नहीं गिना गया।
यह आदेश कैट इलाहाबाद पीठ में सदस्य (न्यायिक) रजनीश कुमार राय ने दिया है। आवेदक के लिए अधिवक्ता सैयद वाजिद अली ने दलील रखी। सुप्रीम कोर्ट के प्रेम सिंह बनाम यूपी, भिखनी देवी बनाम भारत संघ (2026) और कैट इलाहाबाद के चंदी लाल बनाम भारत संघ का हवाला दिया। चंदी लाल मामले में कैट के फैसले को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।
कहा गया कि आकस्मिक अथवा कार्यभारित आधार पर की गई पूर्व सेवा को पेंशन के प्रयोजन के लिए गिना जाना चाहिए। कैट ने आदेश दिया है कि सेवा चार सितंबर 1979 से गिनी जाएगी ना कि केवल 2004 से पोस्टमैन बनने की तारीख से। बेंच ने कहा, आवेदक को ग्रुप ‘डी’ कर्मी मानते हुए तीन माह में ओपीएस के सभी लाभ दिए जाएं। पारिवारिक पेंशन भी ओपीएस से मिलेगी।
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